बस्तर

Audio: बस्तर में जंगल से आया पत्रकार को फोन पुलिसवाला ले लेगा मेरी जान

  • मामला गीदम थाना क्षेत्र में अवैध वसूली का
  • पुलिस वाले ने वसूली एंट्री, बना वीडियो हुआ वायरल
  • गीदम से जाकर दिया बारसूर में पुलिस वाले ने घटना को अंजाम
  • पुलिसकर्मी पर वर्दी का दुरूपयोग करने, वर्दी की आड़ में अवैध वसूली करने, अपने थाना क्षेत्र से दूसरे थाना क्षेत्र में सादे वर्दी में जाकर जानलेवा हमला करने, हमले की साजिश रचने जैसे संज्ञेय अपराध कारित करने के आरोप

प्रभात सिंह @ खबरी चिड़िया दंतेवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के थानों में रोजाना चलने वाले वाहनों से उनके थाना क्षेत्रों में घुसने की कीमत अवैध रूप से वसूल की जाती है। ऐसे अवैध वसूली के किस्से अक्सर सुनने को मिलते हैं । लेकिन बस्तर में पुलिसिया खौफ ऐसा की पुलिसवालों की करतूतों के खिलाफ शिकायत करने वाले लोग सामने नहीं आ पाते हैं।

बस्तर में ऐसे भी पुलिस द्वारा आम जनता को नक्सल मामले में फँसाकर फर्जी आत्मसमर्पण कराने, जेल भेजने और फर्जी मुठभेड़ में हत्या करने के आरोप लगातार लगते रहते हैं। छत्तीसगढ़ में पुलिस के कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मी इसी का खौफ दिखाकर आम जनता से वसूली का रास्ता अपनाते हैं।

ऐसा ही एक अपराध गीदम थाने के एक जवान ने कारित किया है। हुआ यूँ, कि हर बार की तरह दंतेवाड़ा स्थित राधिका टेंट हाउस के कर्मचारी टेंट लगाने के ऑर्डर पर निकले थे। इस बार किसी आयोजन में उन्हें दंतेवाड़ा से बारसूर के लिए करीब 30 किलोमीटर दूर टेंट लगाने का आर्डर मिला था। दंतेवाड़ा से बारसूर के रास्ते करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर गीदम नगर पड़ता है।

जैसे ही वे गीदम थाना क्षेत्र में अपनी सामानों से लदे वाहन लेकर पहुँचे तो गीदम पुलिस के एक जवान अवधेश तिवारी ने अपने इलाके में इंट्री वसूली के लिए रोककर रुपये ऐंठ लिए, खबर है कि इस घटना का वीडियो गाड़ी में ही बैठे उसके किसी साथी ने बना लिया और वायरल कर दिया।

इस घटना से क्षुब्ध पुलिस वाले ने बारसूर थाना क्षेत्र में घुसकर सातधार रोड़ पर किसी वैवाहिक कार्यक्रम में टेंट का काम कर रहे बुद्धू की जमकर पिटाई करने लगा। वह बुद्धू को नक्सल और आतंकी मामले में फँसाकर जेल भेजने और फर्जी मुठभेड़ में हत्या की भी धमकी देता जा रहा था। इस जानलेवा हमले से किसी तरह वह जान बचाकर जंगल की ओर भागा।

विपरीत परिस्थितियों में भी बुद्धू ने हार नहीं मानी और अपनी बुद्धि का सहारा लिया। उसने तत्काल अपने मोबाइल से नंबर निकालकर दंतेवाड़ा के एक दैनिक अखबार के पत्रकार से संपर्क कर आपबीती बताई। तो पूरा वाकया पत्रकार के मोबाइल एप से ऑटोकॉल रिकॉर्डर में सुरक्षित हो गया। जिसे पत्रकार महोदय ने पुलिस अफसरों के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किया जहाँ पत्रकारों ने शीघ्र कार्रवाई की माँग की है।

दंतेवाड़ा एसपी डॉक्टर अभिषेक पल्लव ने उक्त जवान को निलंबित कर आगे की कार्रवाई का भरोसा तो दिया है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि क्या ऐसे अपराधी प्रवृति के पुलिसकर्मी पर वर्दी का दुरूपयोग करने, वर्दी की आड़ में अवैध वसूली करने अपने थाना क्षेत्र से दूसरे थाना क्षेत्र में सादे वर्दी में जाकर जानलेवा हमला करने, हमले की साजिश रचने जैसे संज्ञेय अपराध कारित करने के आरोप में पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वयं प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर प्रार्थी को न्याय मिलता है या फिर अधिकांश मामले की तरह इस मामले में भी पुलिस अफसर आरोपी पुलिसकर्मी को आगे बचाने की कोशिश करेंगे।

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