बस्तर

लोकतांत्रिक और जनताना सरकार दोनों रिहाई के पक्ष में फिर भी आदिवासी जेल में कैद

  • सात हजार आदिवासियों ने सभा कर परिजनों के रिहाई की माँग की
  • सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी को किया आमंत्रित
  • माओवादियों ने भी दिया आदिवासियों को समर्थन
  • आदिवासियों की रिहाई कांग्रेस सरकार का चुनावी एजेंडा

खबरी चिड़िया @ दंतेवाड़ा आदिवासियों को फर्जी मामले में गिरफ्तार करने, उनके ऊपर फर्जी मामलों के बाद फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर देने और फर्जी मामलों के बाद कथित आत्मसमर्पण कर पुलिस अफसरों के अवार्ड लेने का सिलसिला भाजपा के बाद कांग्रेस सरकार में भी जारी है।

इन सबके बीच कांग्रेस सरकार ने विधानसभा चुनाव के पहले वादा किया था कि जेल में बंद फर्जी मामले में गिरफ्तार आदिवासियों की रिहाई के लिए सरकार उचित कदम उठाएगी।

ऐसे गंभीर मुद्दे पर आदिवासियों का वोट पाकर कांग्रेस चुनाव तो जीत गई। लेकिन एक साल बीतने को है कांग्रेस अपना चुनावी वादा पूरा करने में असमर्थ रही है। सरकार ने हालांकि सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए.के. पटनायक की अध्यक्षता में भारतीय दण्ड विधान एवं स्थानीय विशेष अधिनियम के तहत प्रकरण वापसी को लेकर कमेटी गठित किया था। जिसमें 1141 मामलों में चर्चा कर 340 प्रकरणों के 1552 आदिवासी बंदियों को शीघ्र रिहा करने का निर्णय लिया था। लेकिन सरकार अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुँची है।

कांग्रेस की इस वादाखिलाफी के बाद दंतेवाड़ा और सुकमा के सरहदी इलाके गोंडेरास में आदिवासियों ने जेल में बंद अपने परिजनों की रिहाई के लिए 13 सितंबर को एक सभा का आयोजन किया था। जिसमें करीब 07 हजार आदिवासी उपस्थित थे। इस सभा में आदिवासियों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी को भी आमंत्रित किया था। आदिवासियों को सोनी सोढ़ी ने भरोसा दिलाया है कि उनके सैकड़ों परिजनों की रिहाई के लिए वकीलों की मदद और जेल में व्यवस्था सुधार के लिए उनके आंदोलन को सड़क से लेकर न्यायालय तक लड़ने कृत संकल्पित हैं।

आदिवासियों ने अपने परिजनों की रिहाई के लिए सूची तैयार की है जिसमें सैकड़ों लोगों के नाम है जो दंतेवाड़ा और जगदलपुर की जेलों में पिछले 3-4 सालों से बंद है। पुराने मामलों के आंकड़े आदिवासी जुटा रहे हैं। जिसकी सूची वे सोनी सोढ़ी को देंगे।

दूसरी ओर आदिवासियों का हमेशा से यह आरोप रहा है कि सरकार के अपराधी प्रवृति के पुलिस अफसर आदिवासियों को जंगलों में उनके घर से पकड़कर ले जाते हैं और उनकी रास्ते में गोली मारकर हत्या कर देते हैं फिर शहर में प्रेसवार्ता कर उन्हें नक्सली साबित करने में लगे हैं।

माओवादियों के जनताना सरकार के कब्जे वाले इस इलाके में आयोजित इस कार्यक्रम में माओवादियों ने भी बैनर पोस्टर के साथ शिरकत की और आदिवासियों की रिहाई के लिए लोकतांत्रिक कांग्रेस सरकार से अपील भी की है।

माओवादियों ने क्रांतिकारी गीतों पर नाच गाकर आदिवासियों को अपनी पार्टी की ओर आकर्षित किया। नक्सलियों ने नाटक का प्रदर्शन भी किया जिसमें आदिवासियों पर पुलिसिया अत्याचार, फर्जी मुठभेड़ में हत्या और कथित आत्मसमर्पण को अपने नाटक में प्रदर्शित किया।

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