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अभिव्यक्ति

पत्रकारों का लिंचिस्तान ना बन जाए छत्तीसगढ़

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उत्तम कुमार ( संपादक दक्षिण कोसल) @ खबरी चिड़िया छत्तीसगढ़ में लगातार पत्रकारों पर हमले तेज हो गए हैं। अगर देशभर की स्थिति का जायजा ले तो स्थिति गंभीर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित कथित आपत्तिजनक सामग्री शेयर करने पर पत्रकार प्रशांत कनौजिया सहित एक टीवी चैनल के संपादक और उसके प्रमुख (हेड) की गिरफ्तारी की एडिटर्स गिल्ड तथा कई मीडिया संगठनों ने निंदा की है। मुंबई में महिला पत्रकार निकिता राव ने जब सरकार से सवाल पूछे तो अपराधियों ने उन पर प्राणघातक हमला कर दिए। वहीं आदिवासियों के जिंदगी पर लंबे समय से लिखने वाले पड़ोसी राज्य झारखंड के जाने माने पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को माओवादी होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। पत्रकार कमल शुक्ला अपने फेसबुक वाल में लिखते हैं कि छत्तीसगढ़ में सप्ताह भर में तीन पत्रकार अस्पताल में और 22 से ज्यादा पर फर्जी मामले चल रहे हैं। बिजली गुल की खबर लिखने के कारण पत्रकार दिलीप शर्मा को पुलिस वालों ने यातना दी। पत्थलगांव के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र चेतवानी के ऊपर कुछ लोगों ने जमीन विवाद के चलते हमला कर दिया। पुलिस ने हमलावरों पर कार्रवाई करना तो छोड़ सुरेंद्र चेतवानी के खिलाफ मामला तक दर्ज कर लिया। ईटीवी भारत न्यूज चैनल के संवाददाता उमेश जायसवाल के साथ गम्भीर मारपीट कर आहत एवं लूट पाट करने का मामला सामने आया है। रायपुर के पत्रकार अभिषेक झा पर कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया। अभिषेक के सिर पर गम्भीर चोटें आई है। कमोबेश पत्रकारों पर हमले का तरीका लिंचिंग से कम नहीं हैं। हां यहां बहाने अलग-अलग है।

24 जून को बीजापुर सीईओ जिला पंचायत ने 8 पत्रकारों को कार्यालय बुलाया और उन्हें गंदी और भद्दी गालियां देकर केबिन के अंदर ही पीटने की धमकी दे दी। पीडि़त पत्रकारों में से न्यूज 18 के सवांददाता मुकेश चंद्रकार और आईएनएच सवांददाता युकेश चंद्राकर का कैमरा तथा मोबाइल छीन लिया, इतना ही नहीं अन्य पत्रकारों ईश्वर, मुख्तार खान, लोकेश जारी, पंकज दाऊद, गुप्तेश्वर जोशी को देख लेने और कार्यालय के कर्मचारियों से पिटवाने की धमकी भी दी। मजीठिया कमीशन के लिए लंबे समय से संघर्षरत पत्रकार पीसी रथ लिखते हैं कि आठ पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया गया है, मुख्यत: नाराजगी ओडीएफ फंड के दुरूपयोग की खबर छप जाने की थी। जो पत्रकार ठेकेदारी और सप्लाई के कामों में नही लगे हैं निर्द्वंद पत्रकारिता कर रहे हैं वे इसी तरह प्रशासन के भ्रष्ट तंत्र के टारगेट बन जाते हैं। पत्रकार अनिल मिश्रा ने लिखा है कि बीजापुर जिला पंचायत के सीईओ राहुल वेंकट प्रशासन नहीं माफिया गिरोह चला रहे। सरकारी कर्मचारी उनके गैंग के गुर्गे हैं। किसी ने आवाज उठाया तो उन्हीं गुर्गों से पिटवा सकते हैं। कांग्रेस के राज में प्रशासन ऐसे ही चलेगा। बेहतर न्याय। बेचारे बीजापुर के पत्रकार। पिटते रहे और रोने भी न दिया।

महासमुंद निवासी पत्रकार दिलीप शर्मा को पुलिस वाले रात लगभग 12 बजे जब वे अपने घर पर परिवार के साथ सो रहे थे पुलिस ने दरवाजे पीटते चिल्लाते हुए पत्रकार को उठाया। शर्मा की डरी-सहमी बेटियां दरवाजे से झांकने लगती हैं और उनसे पूछती हैं- ‘भैया, आप लोग कौन हो? और पिताजी को क्यों बुला रहे हो?’वे लोग सिर्फ यही कहते रहे कि दिलीप शर्मा को बाहर भेजो! पत्रकार दिलीप शर्मा की बेटी ने जब दरवाजा खोला तो तेज रफ्तार के पुलिस घर में दाखिल हो गए। इस दौरान 45 साल के दिलीप शर्मा को पकड़ कर पुलिस वाले अपनी गाड़ी में बिठाकर चल दिए। दिलीप को कपड़े तक न पहनने दिया गया। वे शरीर पर सिर्फ बनियान और टावेल लपेटे थे। पुलिसवालों ने रात भर पत्रकार दिलीप शर्मा को यातनाएं दी। खबर मात्र बिजली गुल होने की थी। कई गांवों में लगातार बिजली गुल होने से लोग परेशान थे। छत्तीसगढ़ में इस कड़वे सच को लिखना इस पत्रकार के लिए गुनाह हो गया। इसकी सजा दिलीप शर्मा भुगत रहे हैं। एक अपराधी की तरह उन्हें घर से उठाने से लेकर कोर्ट में पेश करने और अब जमानत मिल जाने तक की प्रक्रिया फिलहाल पूरी हो गई है। लेकिन इस दौरान जो अमानवीय हरकत पत्रकार दिलीप शर्मा के साथ की गई, वह शर्मनाक है। इस घटनाक्रम ने हर किसी को चौथे स्तंभ के खिलाफ व्यवस्था की तानाशाह मानसिकता का पर्दाफाश किया है।

ताजा मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर का है। जशपुर में लगातार पत्रकारों पर हमले और मानसिक प्रताडऩा के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे नाराज पत्रकार अब आंदोलन की राह पर उतर आए हैं। पत्थलगांव के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र चेतवानी के ऊपर कुछ लोगों ने जमीन विवाद के चलते हमला किया। पुलिस ने हमलावरों पर कार्रवाई करना तो छोड़ सुरेंद्र चेतवानी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। ऐसे में पुलिस के दोहरे रवैए के खिलाफ पत्रकार एकजुट हो गए हैं। इस पूरी घटना से सुरेंद्र चेतवानी और उनका परिवार दहशत में है। दूसरे मामले में आईबीसी 24 के रिपोर्टर विकास पांडे के साथ जिला अस्पताल में मारपीट की हैं। वहां शराब के नशे में धुत होकर नगर सैनिक ने लोगों को पत्रकार के खिलाफ भडक़ा दिया। इससे विकास पांडे के साथ मारपीट की गई। इस पूरे मामले में जशपुर के सभी पत्रकार सडक़ पर उतरे और एक सुर में पत्रकारों पर हो रहे हमले और झूठे मामले को खत्म करने को लेकर ज्ञापन सौंपा। पत्रकारों के आंदोलन को देखते हुए अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

इसी तरह रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर थाना क्षेत्र में जांजगीर चांपा निवासी ईटीवी भारत न्यूज चैनल के संवाददाता उमेश जायसवाल के साथ गम्भीर मारपीट कर आहत एवं लूट पाट करने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि वरिष्ठ भाजपा नेता के संरक्षण में टिकेश डनसेना व गुर्गों ने पत्रकार पर हमला किया गया। इस हमले में पत्रकार के सिर पर 18 टांके लगे। घटना के विषय मे अब तक मिली जानकारी के अनुसार घायल पत्रकार का किसी युवती से फेसबुक में मित्रता हुई। उसने योजनाबद्ध तरीके से पहले पत्रकार जायसवाल को मिलने बुलाया। जहां घटना को लेकर स्वयं पत्रकार ने बताया कि यह दोनों अपनी कार में घूमने गए थे, तभी सिंघनपुर रोड पर सामने से आ रही स्कॉर्पियो में कुछ अज्ञात लोग आये, वे लोग गाड़ी से उतरे और पत्रकार जायसवाल के साथ मारपीट कर मोबाइल और उसका सामान लूट लिया। इसके बाद गाड़ी में तोडफ़ोड़ भी की, घटना के बाद लडक़ी कहां गई, इसका अभी तक कोई पता नहीं चल सका है, फिलहाल घायल पत्रकार उमेश जायसवाल को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया है। जहां उनका इलाज जारी है। जिसे लेकर पत्रकार संगठनों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। गौरतलब हो कि हमलावर गुंडे पत्रकार से मारपीट के दौरान सेठ जी को बता देना निपटा दिए है,जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

जबकि आहत पत्रकार ने खुद बताया कि भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीचंद रावलानी के संरक्षण में टिकेश डनसेना स्थानीय स्तर पर विभिन्न असमाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहता है। उसके साथ उसके पिता के विरुद्ध अंचल के आदिवासियों के साथ लाखों रूपयों की धोखाधड़ी करने के अपराध में भादसं धारा 420 सहित विभिन्न गैर जमानतीय धाराओं में अपराध पंजीबद्ध है परन्तु आज तक उसकी गिरफ्तारी सिर्फ भाजपा नेताओं के संरक्षण की वजह से नही हुई है।पत्रकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद सरकार ने बार-बार दावा किया था कि छत्तीसगढ़ में अब पत्रकारों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ना ही उनके खिलाफ झूठे मामले दर्ज होंगे। लेकिन सरकार द्वारा पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और है। हालात पहले जैसे ही हैं। पत्रकारों के उत्पीडऩ के खिलाफ छत्तीसगढ़ में पत्रकार लगातार आंदोलित हैं। कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पत्रकारों ने भाजपा कार्यालय और प्रेस क्लब के सामने लगातार अनवरत प्रदर्शन किया था। पत्रकार छत्तीसगढ़ में अपनी सुरक्षा को लेकर सरकार और जिम्मेदारों से सवाल करने में लगे हैं। पर इन सबके बीच एक बार फिर छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

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