बस्तर

आदिवासियों को जानवरों के साथ सिटी कोतवाल ने दंतेवाड़ा में घंटों रोका

प्रभात सिंह  @ दंतेवाड़ा आदिवासियों की समसे अमूल्य धरोहर पशुधन को बचाने की लड़ाई एक तरफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार के मुखिया भूपेश बघेल की सबसे पहली प्राथमिकता है| आदिवासियों का खेत में प्रमुख सहयोगी उनका जानवर होता है| बीजापुर क्षेत्र में जानवरों की कमी के कारण पशुधन की खरीदी करने आदिवासी लोहंडीगुड़ा क्षेत्र जाते हैं| इसके पीछे जानकार यह तर्क देते हैं कि लोहंडीगुड़ा ईलाका मैदानी क्षेत्र होने के कारण ट्रेक्टर आसानी से पहुँच जाता है| जिसके कारण लोगों में ज्यादा संख्या में जानवरों को रखने और उसके खर्चे उठाने की चाहत अब नहीं है|

ताजा मामला है गंगालूर थाना क्षेत्र के पुसनार और कुरविस गाँव के लोग दर्जनों जानवरों की खरीदी कर दंतेवाड़ा के रास्ते अपने गाँव लौट रहे थे| रात में पेट्रोलिंग ढंग से नहीं कर पाने वाली दंतेवाड़ा पुलिस सुबह उठते ही आदिवासियों को सिटी कोतवाली में घंटों रोके रखी थी| जब हमने  आदिवासियों से इस इस सम्बन्ध में बात कि तो पता चला कि वे जानवरों को खेती कार्य के लिए लोहंडीगुड़ा से खरीदी कर बीजापुर जिले में अपने गाँव पुसनार और कुरविस ले जा रहे थे|

आदिवासी ग्रामीण जैसे ही दंतेवाड़ा पहुँचे सिटी कोतवाली पुलिस ने उन्हें रोक कर घंटों बिठाये रखा और जब हम वहाँ पहुँचे और आदिवासियों से बात की तो जानवरों को डॉक्टर के पास चेकअप करवाने के बहाने कोतवाली थाने के सामने से हटाकर उन्हें भेज दिया गया| आदिवासियों ने बताया कि दंतेवाड़ा पुलिस उन पर जानवरों को चोरी करके ले जाने का आरोप लगाकर रोके रखी है| जबकि इस क्षेत्र में काम करने वाले पुलिस को पता होना चाहिए कि अंदरूनी इलाके के आदिवासियों में चोरी की प्रवृति नहीं होती है| इतने तादाद में आदिवासी चोरी करके तो जानवर नहीं लायेंगे |

हमने इस सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक पल्लव से बात कि तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जताई और कहा कि हम देख लेते हैं आदिवासियों को ऐसे कोई नहीं रोक सकता है किसी ने रोका है तो हम उन्हें छोड़ने के लिए तुरंत आदेश देते हैं| बीजापुर विधायक और बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम शाह मंडावी से हमने बात कि तो उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप करने की बात कही है|

 छत्तीसगढ़ के घुर नक्सल प्रभावित मानपुर क्षेत्र के पानाबरस में इसी साल 10 मार्च रविवार को लाल श्याम शाह महाराज की पुण्यतिथि पर सभा को  सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि प्रदेश सरकार की चार चिन्हारी नरवा, गरवा, धुरवा, और बारी से प्रदेश समृद्ध होगा। अब देश में प्रदेश की पहचान नरवा गरुवा धुरवा और बारी से होगा। इसके तहत गांवों में सर्वसुविधा युक्त गौठान होगा। जहां दिन भर मवेशी रहेंगे। चरवाह मवेशी को चराने जंगल लेकर नहीं जाएगा, मवेशी के गौठानों में गोबर सयंत्र लगाये जाएंगे। इसके लिए बाकायदा योजना लागू कि गई है| जिसे नरवा, गरुवा, धुरवा बारी नाम दिया गया है| जिसमें पशुधन को बचाने गोठान बनाने की योजना है|

इस योजना का हाल बीजापुर जैसे जिले में कभी लागू हो भी पायेगा इस पर संशय है | क्योंकि घोर नक्सल पीड़ित क्षेत्रों में अधिकारी ठेकेदार नेता पत्रकार अपनी भ्रष्टाचार की योजना बनाने में सबसे आगे रहे हैं| जिसके कारण जमीन पर योजनाओं का लाभ आजतक नहीं दिखा है| ऐसे में कांग्रेस सरकार की लाज ये आदिवासी ही बचायेंगे|

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