छत्तीसगढ़

राजनांदगांव: कलेक्टर ने आवश्यक वस्तुओं से संबंधित उद्योग शुरू करने को लेकर किया विमर्श

  • कलेक्टर ने निकट भविष्य में आवश्यक वस्तुओं से संबंधित उद्योगों को शुरू करने की योजना के संबंध में अधिकारियों से किया विचार-विमर्श
  • उद्योग शुरू करने से पहले कार्ययोजना बनाने के निर्देश
  • गाईडलाईन का पालन कराने बनेगी समिति
  • उद्योग संचालकों की वर्कशॉप करने के निर्देश
  • श्रमिकों को कोरोना संक्रमण से बचाने किए जाएंगे समुचित उपाए

सरकारी खबर @ राजनांदगांव कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य ने निकट भविष्य में आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन से संबंधित उद्योगों को शुरू करने के राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में आज संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर जरूरी विचार-विमर्श किया। बैठक में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती तनुजा सलाम, एसडीएम राजनांदगांव श्री मुकेश रावटे, महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं व्यापर केन्द्र राजनांदगांव श्री जे. मेश्राम, श्रम पदाधिकारी श्री अनिल कुजूर, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कुर्रे, जिला पंचायत और जिला कार्यालय में स्थापित कॉल सेन्टरों के प्रभारी अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।


कलेक्टर श्री मौर्य ने बैठक में कहा कि कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं जैसे खाद्य प्रसंस्करण, चिकित्सा संबंधित आवश्यक दवाओं एवं उपकरणों से संबंधित औद्योगिक ईकाईयों को शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इस तरह की ईकाईयों को शुरू करते समय वहां के कामगारों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए समुचित उपाय करना पड़ेगा।


कलेक्टर श्री मौर्य ने कहा कि जरूरी उद्योगों को शुरू करने के लिए कार्ययोजना बनाने तथा केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों का परिपालन सुनिश्चित करने के लिए सीईओ जिला पंचायत की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी। इसमें संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, श्रम विभाग, उद्योग तथा हेल्थ एण्ड सेफ्टी विभाग के अधिकारी शामिल रहेंगे। समिति पर शासन की गाईडलाईन का पालन करने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने जरूरी सामग्री से संबंधित उद्योगों के प्रतिनिधियों की कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। श्री मौर्य ने कहा कि कार्यशाला मे उद्योगों को शुरू करने सभी बिन्दुओं पर चर्चा करने के बाद पूरी तरह प्रमाणित कार्ययोजना बनाई जाए। अलग-अलग उद्योग के लिए अलग-अलग कार्य योजना बनाना उपयोगी साबित होगा।
कलेक्टर श्री मौर्य ने उद्योग शुरू करने के लिए कामगारों की व्यवस्था करने के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उद्योगों में उत्पादन शुरू करने स्थानीय श्रमिकों को नियोजित किया जाना उचित होगा। उद्योग संचालकों को कार्यशाला में स्पष्ट रूप से बताया जाए कि एक बार श्रमिक उद्योग परिसर के अंदर आएंगे तो वे बाहर नहीं जा पाएंगे। 28 दिन तक लगातार रहकर काम करेंगे।

श्रमिकों के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था परिसर में ही होगी। श्री मौर्य ने कहा कि एक निश्चित राशि पर प्रबंधन द्वारा सुबह के नाश्ते के साथ दोपहर और रात्रि के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को नाश्ते और भोजन के लिए मीनू और रेट लिस्ट बनाने के निर्देश दिए। श्री मौर्य ने कहा कि भोजन में दाल, सब्जी, चावल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। भोजन साफ-सुथरा हो इसका भी ध्यान रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रबंधन की ओर से कामगारों के लिए मास्क, सेनेटाईजर, टॉयलेट, साबुन की व्यवस्था होनी चाहिए। श्रमिकों के लिए परिसर में ही आवास के प्रबंध किए जाएं। कूलर और पंखे की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से होनी चाहिए।


श्री मौर्य ने कहा कि उद्योग शुरू होने के बाद निरीक्षण के लिए विभिन्न अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाए। निरीक्षण के लिए प्रपत्र भी बनाया जाए। श्रमिकों की सुरक्षा और उत्पादन की नियमितता के लिए निरीक्षण की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। श्री मौर्य ने कहा कि किसी भी उद्योग में तकनीकी कौशल से संबंधित वर्करों की व्यवस्था बाहर से करने की जरूरत पड़े तो इसके लिए कलेक्टर से अनुमति लेना जरूरी होगा। श्री मौर्य ने इन सभी मुद्दो पर उद्योग संचालकों से चर्चा करने की जरूरत पर जोर दिया। श्री मौर्य ने कहा कि जिन उद्योगों में उत्पादन शुरू करना है उनका पहले निरीक्षण किया जाए और संचालकों से सहमति लेकर कार्ययोजना बनाई जाए। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद ही उद्योगों को चालू किया जाना उचित होगा। श्री मौर्य ने कहा कि उद्योगों को शुरू करने के लिए श्रमिकों की व्यवस्था करने के संबंध में उद्योग संचालकों से चर्चा की जाए। दूसरे राज्यों और अन्य जिलों के ऐसे श्रमिक जो लॉकडाउन में राजनांदगांव जिले में फंस गए हैं, उन्हें इन औद्योगिक ईकाईयों में रखने के लिए कार्रवाई की जाए।


लॉकडाउन में दूसरे राज्यों में फंसे जिले के श्रमिकों को दी जाएगी आर्थिक सहायता –
कलेक्टर श्री मौर्य ने प्रावधान के अनुसार 20 लाख रूपए की दी स्वीकृति –
राज्य शासन के निर्देशानुसार जिले के ऐसे श्रमिक जो लॉकडाउन में दूसरे राज्यों या दूसरे जिलों में फंस गए हैं, उन्हें जरूरी सहायता देने के लिए 20 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है। कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य ने बैठक में इस राशि के उपयोग की स्वीकृति दी।


श्री मौर्य ने कहा कि ऐसे श्रमिकों को एक निश्चित राशि सहायता के रूप में दी जानी है। सही जरूरतमंद लोगों तक सहायता राशि पहुंचाना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बाहर में फंसे लोगों के लिए सहायता राशि बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कॉल सेंटर के जरिए बाहर में फंसे श्रमिकों की जानकारी ली जाए। वीडियो कॉल से भी श्रमिकों से चर्चा की जा सकती है। कॉल सेन्टर के जरिए श्रमिकों से संपर्क कर सही तरीके से सत्यापित करने के बाद सहायता राशि दी जाए। इसके लिए श्रमिकों के बैंक खाते और आधार नंबर लिया जाए। दूसरे राज्यों या प्रदेश के दूसरे जिलों में लॉकडाउन के कारण रूके श्रमिकों से सहायता राशि की मांग की जाती है तो उनके बारे में संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों से जानकारी लेना आवश्यक है। ग्राम पंचायतों में रोजगार के लिए पलायन करने वाले लोगों की जानकारी होती है।

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