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अरुन्धति के खिलाफ छत्तीसगढ़ के कई थानों में शिकायत मोदी सरकार की आलोचना का आरोप

रायपुर @ बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यासकार अरुंधति रॉय के खिलाफ छत्तीसगढ़ सहित देश के अलग-अलग राज्यों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई टिप्पणी को लेकर दर्जनों शिकायतें की गई हैं। हालांकि इनमें अभी एफआईआर दर्ज नही की गई है। 

छत्तीसगढ़ के भिलाई में कोतवाली सेक्टर 6, छावनी, सुपेला, नेवई, तथा जामुल थाने में, दुर्ग के सिटी कोतवाली, मोहन नगर, पुलगांव, रायपुर के सिविल लाइन, सिटी कोतवाली, आजाद चौक, पुरानी बस्ती, सरस्वती नगर, बेमेतरा के नवागढ़ तथा बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में उनके खिलाफ कुल 15 शिकायतें की गई है। इनकी संख्या और बढ़ सकती है। इसके अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल ओडिशा आदि राज्यों में भी शिकायत दर्ज कराने की जानकारी सामने आई है। छत्तीसगढ़ के थानों में शिकायतें ली गई हैं, पर अभी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

अरुन्धति रॉय के खिलाफ शिकायत छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के अधिवक्ता भूपेन्द्र जैन की नेतृत्व में कराई गई। शिकायत के अनुसार जर्मनी के मीडिया संस्थान ‘डायचे वैले’ में अरुन्धति रॉय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत सरकार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए कहा है कि कोविड-19 के माध्यम से मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है, जो देश विरोधी है।

अरुन्धति ऱॉय एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका हैं जिन्होंने 1997 में ‘द गॉड, स्माल थिंग्स’ उपन्यास के लिए बुकर पुरस्कार जीता था। वे कई बार अपनी कड़ी टिप्पणियों के लिए सुर्खियों में आ चुकी हैं, जिसके कारण उन्हें धमकियां भी मिलती रही हैं। भाजपा और मोदी समर्थकों ने उनके खिलाफ अनेक बार सोशल मीडिया पर मोर्चा खोला है। एक बार भाजपा सांसद परेश रावल ने ट्विटर पर कहा था कि ऱॉय का जन्म प्रमाण पत्र दरअसल अस्पताल की ओर से जारी खेद प्रमाण पत्र है। कश्मीर में आतंकियों की जगह जीप पर अरुंधति ऱॉय को बांधकर घुमाना चाहिये। 

अरुन्धित रॉय ने कई बार बयान दिया है कि भारत ने हथियारों के बल पर कश्मीर को हथिया लिया है। उन्होंने कश्मीर का एकमात्र हल उसकी आजादी को भी बताया है। इसे बयान को लेकर एक कश्मीरी पंडित ने उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा भी दर्ज किया था, जिसे बाद में गृह मंत्रालय ने वापस ले लिया था। अरुन्धति रॉय ने एनपीआर और सीएए का भी कड़ा विरोध करते हुए कई बार टिप्पणियां की है। इस कानून को लेकर उन्होंने भारत की तुलना जर्मन के नाजीवाद से भी की थी। 

जेएनयू में छात्रों के आंदोलन का वे समर्थन करती रही हैं। 

क्या कहा अरुन्धति रॉय ने 
अरुन्धति रॉय का इंटरव्यू ‘डायचे वैले’ में करीब एक सप्ताह पहले प्रकाशित, प्रसारित हुआ था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कोविड-19 महामारी मुसलमानों के खिलाफ नफरत का संकट पैदा कर रहा है। भारत सरकार मुसलमानों के दमन के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इसकी तुलना नाजियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति से की थी। उन्होंने कहा था कि स्थिति नरसंहार के करीब पहुंच चुकी है। भारत के लोग न केवल कोविड-19 से बल्कि भूख और घृणा के संकट से भी पीडि़त हैं। भाजपा और उसकी मातृ संस्था कोविड-19 को भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के एक अवसर में देख रही है, जिस तरह से जर्मनी में किया गया था। (छत्त्तीसगढ़ संवाददाता)

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