छत्तीसगढ़

कांग्रेस ने आवासीय पट्टा का बनाया था कानून, अब भूपेश बघेल की सरकार तोड़ रही है गरीबों के मकान

बिलासपुर: कोरोना के इस वैश्विक संकट से समूचा विश्व जूझ रहा है. संक्रमितों की संख्या और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ऐसे में जब बिलासपुर रेड जोन में आता है. और अब मानसून भी आ गया है. इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद क्या किसी भी गरीब के मकान कानूनी या गैरकानूनी रूप से तोड़कर बिलासपुर से हटाने का काम किया जाना चाहिए. नहीं न! फिर बिलासपुर में अरपा नदी पर बैराज बनाने के नाम पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस सरकार द्वारा गैरकानूनी तरीके से किसी भी गरीब का मकान तोड़ा जाना उचित नहीं है.

ऐसे में राहुल गांधी से लोग पूछेंगे कि आपके कांग्रेस शासित प्रदेश में जहाँ कोविड-19 संक्रमित क्षेत्र का रेड जोन है. वहाँ आपकी सरकार लोगों के घर उजाड़ रही है. तो राहुल गांधी क्या जवाब देंगे ? कोई दूसरी सरकारें कांग्रेस के बनाए कानून को माने या न माने पर कांग्रेस को उनके अपने बनाए कानून को तो मानना ही पड़ेगा. कांग्रेस ने जो नियम बनाया था कि जब जरुरत पड़े तो गरीबों को सरकारी जमीन से कैसे हटाया जायेगा, उस कानून को मानना ही पड़ेगा.

नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्तियों को पट्टा धृतिय अधिकारों का प्रदान किया जाना अधिनियम 1984 कानून के तहत डीम्ड पट्टा देने का प्रावधान

अरपा नदी के दोनों तटों पर रिक्शा चलाने वाले, ठेला चलाने वाले निवास करते थे. अर्जुन सिंह देश के उन नेताओं में से एक थे. जिनके दिमाग में गरीबों के लिए बहुत सारी योजनायें थी. वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे. राजनीति में ऐसा दूर दूर तक हम ऐसा व्यक्ति नहीं पाते हैं. जितनी मदद अर्जुन सिंह ने गरीबों के लिए की उतनी मदद और किसी ने नहीं की होगी. जितने भी जन हितैषी कानून हैं वो गरीबों के लिए अर्जुन सिंह ने बनाए थे. तेंदुपत्ता में मालिकाना हक़ भी उन्ही का दिया हुआ कानून है.

अर्जुन सिंह ने 1984 में एक कानून बनाया था. उस कानून का नाम था, नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्तियों को पट्टा धृतिय अधिकारों का प्रदान किया जाना अधिनियम 1984, इस कानून में डीम्ड पट्टा देने का प्रावधान है. अर्जुन सिंह ने कहा था जो गरीब लोग हैं जो गाँव छोड़ कर शहर में आते हैं उनके पास इतना पैसा नहीं होता है कि वो कहीं मकान किराए में लेकर रिक्शा चलाकर या कोई काम करके अपना रोजीरोटी चला सके. वो शहर के किनारे जहाँ सरकारी जमीं होती है जो स्लम एरिया होता है वहा जाकर झोपड़ी डालकर वे रहने लगते हैं. कालान्तर में वो जगह बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है और बिल्डर्स वगैरह का ध्यान चला जाता है फिर उनको वहाँ से उजाड़कर फेंक दिया जाता है और उनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है. ये इतने गरीब लोग होते हैं जो अपने लिए पट्टे की भी कारवाई नहीं कर पाते हैं. पटवारी के पास जाते हैं तो वो पैसा मांगता है. तहसीलदार के पास जाते हैं तो वो पैसा मांगता है. तो इस तरह से गरीब लोगों को शहर में बसने का कोई जरिया ही नहीं बनता है. तो उन्होंने एक कानून बनाया “डीम्ड पट्टे का कानून.” डीम्ड पट्टे का कानून मतलब उन्होंने कानून में ही कह दिया कि जिस दिन से ये पास हो जायेगा.

उस दिन से सरकारी जमीन पर शहर में नगर निगम के क्षेत्र में, नगर पालिका क्षेत्र के भीतर, नगर पंचायत क्षेत्र के भीतर जो गरीब लोग सरकारी जमीन पर एक डिसमिल डेढ़ डिसमिल पर यदि मकान बनाकर रह रहे हैं तो ये कानून के पास होते ही ये माना जायेगा कि सरकार ने उनको पट्टा दे दिया है और वो अपने पट्टे वाली जमीन पर निवास कर रहे हैं. ये डीम्ड पट्टे का कानून है. जब यह कानून पास हो गया तो अब यह कैसे प्रमाणित होगा कि ये जो लोग यहाँ रह रहे हैं और वो 1984 के पहले से काबिज हैं. तो अर्जुन सिंह ने कहा कि हम इसके जाँच करने का जिम्मा भी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को दे देंगे तो वे लोग जिनकी नजर इन ज़मीनों पर गई है कानून बनने के बाद पता चलेगा कि वो पटवारी को पैसे देकर अपने पक्ष में प्रमाणपत्र बनवा लेंगे कि ये 1984 के पहले से रह रहे हैं. जबकि वास्तव में 1984 के पहले से जो रह रहा है वह उस पट्टे से वंचित हो जायेगा तो अर्जुन सिंह ने एक रूल्स बनाया और उस रूल्स में कहा गया कि एक नागरिक समिति बनेगी और सारे पावर उस समिति को दिए जायेंगे.

वह नागरिक समिति कौन होगी जो उस स्लम एरिया में रह रहे हैं. उन्ही के बीच के लोगों की नागरिक समिति बनेगी. वे लोग ही अपना अध्यक्ष चुनेगे और वे प्रमाणित कर लेंगे कि वो कब से रह रहा है. उनसे कोई प्रमाणपत्र नहीं माँगा जायेगा. बिजली बिल लाओ राशन कार्ड लाओ कुछ नहीं. अगर वह समिति प्रमाणित कर देगी कि यह वहाँ रह रहा है तो यह माना जायेगा कि यह वहीं पर रह रहा था. सभी तरह से उन्होंने गरीबों को सुरक्षा प्रदान की और पुरे मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्र में गरीबों को डीम्ड पट्टा दे दिया गया और बाद में वे राजीव गांधी आश्रय योजना लेकर आये. जिसके तहत जो भी एक डेढ़ डिसमिल जमीन पर काबिज थे उन सभी लोगों को पट्टा वितरण का काम किया गया.

जब 2000 में छत्तीसगढ़ बना तो अजीत जोगी ने इस कानून में संशोधन कर कहा कि जहाँ पर सन 1984 लिखा है उसे सन 2002 पढ़ा जाए और 2002 से जो भी काबिज थे इसी कानून के तहत सबको उन्होंने पट्टा दे दिया गया.

कालान्तर में अरपा नदी का गला घोंट दिया गया अब अलग अलग नदियों नालों को जोड़कर अरपा नदी पर बैराज बनाने का काम किया जा रहा है. अरपा नदी के किनारे जो लोग रह रहे हैं उन्हें नहीं भी हटाया जाए तो बैराज बन सकता है. सड़क बन सकती है लेकिन सरकारी जमीं है तो उनको हटाना है हटाने की कारवाई चल रही है. कल वहाँ तोड़फोड़ होने वाला है.

मुद्दा यह है कि इस कानून में अर्जुन सिंह ने एक और व्यवस्था किया जिसके तहत किसी गरीब आदमी को पट्टा दे दिया गया है और किसी को भी नशा चढ़ जाए और कहे कि इन्हें अब हटना है तो ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कलेक्टर एसपी आयुक्त नगर निगम के साथ उस बस्ती के चेयरमैन के साथ मीटिंग होगी और उन्हें बताया जायेगा कि इस सरकारी जमीन का यह उपयोग होना है और आपको वहाँ पर हम बसायेंगे और उनको अन्यत्र बसाने की व्यवस्था पहले की जायेगी. यदि पट्टाधारी तैयार नहीं होते हैं तो उन्हें और दुसरे जगहों के विकल्प दिखाए जायेंगे और बातचीत करके उन्हें सहमत किया जायेगा. जब उन्हें पूरी तरह व्यवस्थापित कर लिया जायेगा तब ही उस जगह को सरकार वापस ले सकेगी. इसके बाद भी व्यवस्था डेवलप होने के बाद यदि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें फिर से उसी जगह पर बसाया जा सकता है तो उन्हें फिर से वहाँ बसाने की व्यवस्था की जायेगी.

लेकिन जब भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ में आई तो मनमाने तरीके से विकास के नाम इस कानून को दरकिनार कर तोड़फोड़ हुए और लोगों को गैरकानूनी रूप से बेदखल किया जाता रहा है.

उल्लेखनीय है कि अरपा नदी में बारहों माह पानी और सौंदर्यीकरण शहर विकास के लिए कांग्रेस द्वारा किये गये प्रमुख वायदों में से एक है। बीते दिनों प्रमुख सचिव आर.पी.मंडल ने बिलासपुर प्रवास के दौरान अरपा नदी का निरीक्षण किया था और अधिकारियों को इस कार्य को प्राथमिकता से शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद से पिछले चार-पांच दिन से नगर निगम प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसके तहत बहतराई में अटल आवास पर बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई तो कल पुलिस ने आरोप लगाया कि उन पर हमला हो गया था। इसके पहले लोगों ने कलेक्टोरेट के सामने चक्का जाम भी कर दिया था। शहर के  दोनों छोर पर अरपा नदी के विभिन्न मोहल्लों में लोगों ने कच्चे-पक्के मकान बना लिये हैं जिनकी संख्या 500 से अधिक है। इन्हें बेदखली के लिए नोटिस दी गई है और सोमवार से नगर निगम द्वारा कार्रवाई शुरू की जायेगी। इनमें से कईलोगों का कहना है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिली है।  इनका यह भी कहना है कि कुछ दिनों बाद बारिश शुरू होने वाला है ऐसी स्थिति में कोई भी निर्माण कार्य कैसे शुरू किया जायेगा। वे कोरोना संकट का हवाला भी दे रहे हैं।

विधायक शैलेष पांडे (फोटो: डेली छत्तीसगढ़)

प्रभावित हो रहे लोगों ने विधायक शैलेष पांडेय से मिलकर अपनी समस्या बताई और कार्रवाई रोकने की मांग की है। विधायक शैलेष पांडे ने कलेक्टर को पीड़ितों की समस्याओं से अवगत कराया है और यह ध्यान रखने के लिए कहा है कि कोरोना संकट के दौरान उन्हें कोई क्षति न हो, उन्हें शिफ्टिंग के लिए पर्याप्त समय दिया जाये तथा जिनके आवास स्वीकृत हो चुके हैं उनको शीघ्र आबंटन किया जाये। पांडे ने कलेक्टर को लिखे पत्र में कहा है कि अरपा विकास योजना में तिलक नगर, वाल्मिकी मोहल्ले, बंधुवापारा, नाग-नागिन तालाब और शासकीय मकानों में कब्जा करके रह रहे बहतराई के लोगों ने उनसे अपनी समस्या बताई है। सरकार इन सभी के लिए मकान दिलाने के लिये कार्य कर रही है। तिलकनगर और वाल्मिकी मोहल्ले के लोगों ने वहीं पर मकान देने की मांग की है और शिफ्टिंग के लिए समय मांगा है। बंधुवापारा और बहतराई के लोगों ने बताया है कि अचानक उनका कब्जा छीन लेने से सिर से छत नहीं है और अब समस्या है कि सड़क पर आये परिवार को लेकर कहां जायें। कोरोना संकट के समय इनको हटाना क्या उचित था? प्रशासन द्वारा बेदखल परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जाये। विधायक ने कलेक्टर से कहा है कि इनकी समस्याओं का हर संभव तरीके से निराकरण किया जाये। 

उच्च न्यायालय के वकील अमरनाथ पांडे ने मुख्यमंत्री के राजनितिक सलाहकार विनोद वर्मा को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है…..

विनोद भैया नमस्ते, बिलासपुर मैं अरपा नदी के किनारे बसे गरीब लोगों को राजीव गांधी आश्रय योजना के अंतर्गत आवासीय पट्टा दिया गया था जिसे तोड़ने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन के द्वारा संयुक्त कार्यवाही करते हुए उक्त लोगों को नोटिस दी गई है मकान तोड़फोड़ की कार्रवाई आज और कल यानी 7 और 8 जून को होनी है बिलासपुर रेड जोन में है यह जो समय है करो ना वैश्विक महामारी का समय है इस समय मकानों में तोड़फोड़ करना कतई उचित नहीं है आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि 1984 में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह जी के द्वारा शहरी गरीब लोगों के पक्ष में ऐतिहासिक कानून बनाया गया था जिसका नाम है नगरी क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्तियों को पट्टा धृतिय अधिकारों का प्रदान किया जाना अधिनियम 1984 इस कानून में डीम्ड पट्टा देने का प्रावधान है इस कानून में यह व्यवस्था की गई है कि जो लोग शहरी क्षेत्र के गरीब  व्यक्ति है जो लगभग 1 डिसमिल की जमीन पर काबिज हो कर निवास कर रहे हैं यह माना जाएगा कि उन्हें सरकार ने पटा दे दिया है यह बहुत ऐतिहासिक कानून बनाया गया पिछले 15 सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस तरह के तमाम गरीब लोगों का मकान तोड़ दिया और अब कांग्रेस की सरकार में यह तोड़फोड़ शुरू हुआ है अर्पा नदी में बैराज बनना है उसके लिए लोगों को हटाने की कार्यवाही किया जाना है लेकिन उक्त कार्यवाही बलपूर्वक की जगह वैधानिक तरीके से हो सकती है सबसे पहले लोगों से बातचीत किया जाना चाहिए और उन्हें कहीं व्यवस्थित करने के बाद ही तोड़फोड़ की कार्यवाही किया जाना चाहिए और अभी तो जबकि करोना  महामारी से पूरा प्रदेश जूझ रहा है ऐसे में यह तोड़फोड़ कतई उचित नहीं है मैं चाहता हूं कि आप माननीय मुख्यमंत्री जी को मेरी भावना से अवगत कराइए और तत्काल रोक लगाने की कार्यवाही कीजिए.

Most Popular

To Top
Open chat