छत्तीसगढ़

आयकर विभाग के पास डायरी की कॉपी, बीजेपी नेताओं और जजों को 1800 करोड़ रुपए देना का हिसाब : कारवां मैगजीन

कारवां को प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि आयकर विभाग के पास डायरी के ऐसे पन्ने हैं जो बताते हैं कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं, उसकी केन्द्रीय समिति के नेताओं, जजों और वकीलों को 1800 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया था. येदियुरप्पा ने इन कथित भुगतानों को कर्नाटक विधान सभा की साल 2009 की विधायक डायरी में कन्नड भाषा में अपने हाथों से दर्ज किया है. इस डायरी एंट्री की कॉपी आयकर विभाग के पास 2017 से है. येदियुरप्पा ने लिखा है कि उन्होंने बीजेपी की केन्द्रीय समिति को 1000 करोड़ रुपए दिए हैं. उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को 150-150 करोड़ रुपए, गृहमंत्री राजनाथ सिंह को 100 करोड़ रुपए और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को 50-50 करोड़ रुपए दिए हैं. इन भुगतानों के अतिरिक्त इस डायरी में गडकरी के “बेटे की शादी के लिए” 10 करोड़ रुपए देने की बात भी दर्ज है. येदियुरप्पा की डायरी में जजों को 250 करोड़ रुपए और वकीलों को 50 करोड़ रुपए (केस लड़ने की फीस) देने की बात भी है, लेकिन किसी का नाम डायरी में नहीं है.

बीजेपी नेताओं, जजों और वकीलों को किए गए भुगतान को डायरी में 17 जनवरी 2009 की पंक्ति में लिखा है और बीजेपी के केन्द्रीय नेताओं को किए गए भुगतान की एंट्री 18 जनवरी 2009 की लाइन में है. यह स्पष्ट नहीं है कि ये एंट्री इसी दिन की गई थी या बाद में इन तारीखों के आगे ये एंट्री भरी गईं. येदियुरप्पा, मई 2008 से लेकर जुलाई 2011 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे. कारवां के पास उपलब्ध डायरी के सभी पन्नों में येदियुरप्पा के हस्ताक्षर हैं.

कारवां के पास उपलब्ध जानकारी से पता चलाता है कि आयकर विभाग और केन्द्र की बीजेपी सरकार के पास डायरी की कॉपी अगस्त 2017 से उपलब्ध थी.  आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने येदियुरप्पा की डायरी एंट्री को वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक बिना हस्ताक्षर वाले नोट के साथ सौंपी थी. उस वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने उस नोट में पूछा था कि क्या प्रवर्तन निदेशालय से इसकी जांच करना उचित होगा. लेकिन जेटली, जिनका नाम डायरी में 150 करोड़ रुपए प्राप्त करने वाले में है, ने उस अधिकारी के नोट पर कार्यवाही नहीं की. गौरतलब है कि 2004 और 2013 के बीच जेटली कर्नाटक राज्य के लिए बीजपी के इंचार्ज थे और उस दौरान हुए चुनावों में पार्टी को देख रहे थे.

कारवां ने येदियुरप्पा, जेटली, गडकरी, सिंह, आडवाणी और जोशी को इन एंट्रियों पर प्रतिक्रिया मांगी थी लेकिन इस खबर के प्रकाशित होने तक किसी ने भी जवाब नहीं दिया. उनकी प्रतिक्रिया आने के बाद रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.

बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व को किए गए कथित भुगतान के अलावा, डायरी में राज्य के विधायकों को किए गए भुगतान का भी उल्लेख है. इन में कुछ विधायकों की 2008 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाए जाने में भूमिका थी. उस साल के विधानसभा चुनावों में येदियुरप्पा ने कांग्रेस, जनता दल (सेक्यूलर) और निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में मिलाकर बहुमत हासिल किया था. उस वक्त येदियुरप्पा को समर्थन देने वाले 6 में से 5 विधायकों को बाद में येदियुरप्पा ने कैबिनेट में शामिल किया था. इनमें से कई नेताओं के नामों का उल्लेख डायरी में है.

कारवां के पास उपलब्ध एक डायरी एंट्री में लिखा है: “मुझे मुख्यमंत्री बनाने में जी जर्नादन रेड्डी की मुख्य भूमिका है.” इस एंट्री के नीचे येदियुरप्पा के हस्ताक्षर हैं. दूसरी लाइन में लिखा है, “जर्नादन रेड्डी ने जिन लोगों को पैसा दिए उन लोगों का विवरण.” उस एंट्री में कथित तौर पर 8 नेताओं को 150 करोड़ रुपए देने की बात लिखी है. डायरी में पी. एम. नरेन्द्रस्वामी का नाम है जिन्होंने 2008 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधान सभा चुनाव जीता था और जिन्हें येदियुरप्पा की कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री बनाया गया था. इसमें कांग्रेस की टिकट से जीतने वाले आनंद असनोटिकर वसंत का नाम है जिन्हें मत्स्य पालन, विज्ञान और प्रोद्योगकि मंत्री बनाया गया. एंट्री में जेडीएस के टिकट से चुनाव जीतने वाले बालाचंद्रा लक्ष्मणराव जर्किहोली का नाम है जिन्हें स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया. आनंद असनोटिकर ने जनवरी 2018 में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया और जेडीएस में शामिल हो गए. इन 8 नेताओं में से 7 नेताओं के नाम के आगे 20 करोड़ रुपए दर्ज हैं. जर्किहोली के नाम के आगे 10 करोड़ रुपए दर्ज है. कारवां ने सभी 8 विधायकों को सवाल भेजे थे लेकिन किसी का जवाब नहीं आया.

येदियुरप्पा की हस्तलिपी में उस नोट में लिखा है कि जी जनार्दन ने वह कथित भुगतान किया था. रेड्डी कर्नाटक के धनी राजनीतिज्ञों में एक हैं. 2008 की येदियुरप्पा सरकार में रेड्डी को पर्यटन, संरचना विकास मंत्री नियुक्त किया गया था. सितंबर 2011 में रेड्डी को सीबीआई ने एक अवैध खनन मामले में बेल्लारी से गिरफ्तार किया था और 2015 में जमानत पर रिहा होने से पहले उन्होंने तीन साल जेल में काटे थे. नवंबर 2018 में रेड्डी को दुबारा गिरफ्तार कर लिया गया. इस बार उन्हें हजारों निवेशकों को ठगने वाली एक निजी कंपनी से 20 करोड़ रुपए की रिश्वत लेने के इलजाम में पकड़ा गया था. उन्हें न्यायिक हिरास्त में भेज दिया गया, फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं. दिसंबर 2018 में अवैध इस्पात खनन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल ने अपनी चार्ज शीट में रेड्डी को आरोपी बनाया था. कर्नाटक लोकायुक्त ने 35 हजार करोड़ रुपए के लौह अयस्क उत्खनन घोटाले, बेलेकेरी पोर्ट मामले, में रेड्डी को मुख्य आरोपी बनाया था. लेकिन बाद में सीबीआई ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए मामले को बंद कर दिया.

2011 में येदियुरप्पा पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरास्त में भेज दिया गया था. कर्नाटक लोकायुक्त ने उन्हें सरकारी जमीन में हेराफेरी और उत्खनन घोटाले में घूस लेने का दोषी पाया था. इस आरोप के चलते येदियुरप्पा सरकार गिर गई थी. उस साल जुलाई में उन्हें मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था और अक्टूबर में उन्होंने विशेष लोकायुक्त अदालत के समाने आत्मसमर्पण कर दिया था. बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया और उन्होंने कर्नाटक जनता पक्ष (केजेपी) पार्टी को पुनरुज्जीवित किया. इस पार्टी का पंजीकरण 2008 में पदमनाभा प्रसन्ना कुमार ने पहली बार कराया था. लेकिन 2014 के लोक सभा चुनावों से पहले नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने येदियुरप्पा और केजेपी को बीजेपी में फिर शामिल करा लिया. बाद में येदियुरप्पा भ्रष्टाचार के इन मामलों से बरी हो गए. 2018 में राज्य विधान सभा चुनाव में वे बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे. फिलहाल येदियुरप्पा राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता हैं.

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