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तिहाड़ जेल प्रशासन से कोर्ट ने कहा: किसी को जेल में रख उसके वकील से मिलने से नहीं रोक सकते

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा है कि वह अपने इस बयान की पुष्टि करे कि जामिया मिलिया इस्लामिया छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष शिफा उर रहमान ने अपने वकील के साथ वीडियो मीटिंग करने से इनकार कर दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विभू बाखरू ने कहा, ‘इस देश में आप किसी को भी पकड़कर जेल में बंद नहीं कर सकते और उससे यह नहीं कह सकते कि आपको आपके वकील से मिलने नहीं दिया जा सकता.’

दरअसल रहमान ने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के संबंध में उन पर और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दिए गए अतिरिक्त समय के विरोध में अदालत में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की.

इस याचिका में उठाए गए मुद्दों में से एक मुद्दा जुलाई में निचली अदालत द्वारा वकील से मिलने के संबंध में दिए गए आदेश के बावजूद रहमान को कथित तौर पर उनके वकील से नहीं मिलने दिया जाना है.

बता दें कि जुलाई में निचली अदालत ने जेल प्रशासन से कहा था कि वह रहमान और उनके वकील के बीच बातचीत की व्यवस्था करें.

रहमान के वकील अमित भल्ला का कहना है कि बिना वकील की उपस्थिति के अदालतों के समक्ष सुनवाई का कोई मतलब नहीं है.

हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि ऐसा नहीं है कि उन्हें (रहमान) कहा गया है कि वह अपने वकील से नहीं मिल सकते.

अदालत ने कहा कि आपने व्यक्ति (रहमान) के उसके वकील से मिलने के हर प्रयास को असफल कर दिया है.

अदालत ने जेल प्रशासन से अपने स्टेटस रिपोर्ट में दिए गए बयानों की पुष्टि के लिए सभी दस्तावेज और सामग्री पेश करने को कहा है.

बता दें कि प्रशासन ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि रहमान की उनके परिवार और वकील से मई और अगस्त में 16 बार फोन पर बात कराई गई.

रिपोर्ट में कहा गया कि रहमान ने अपने परिवार को भी फोन किए हैं लेकिन जब 21 जुलाई और पांच अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बंदोबस्त किया गया तो रहमान ने पहली बार तबियत ठीक नहीं होने की बात कहकर बात करने से इनकार कर दिया जबकि दूसरी बार कनेक्टिविटी की दिक्कत थी.

रहमान के वकील ने पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर कहा कि जेल प्रशासन ने बार-बार उनके ईमेल के बावजूद भी वीडियो मीटिंग कराने की व्यवस्था नहीं की थी.

भल्ला ने अदालत को बताया कि उन्हें 12 जुलाई और आठ अगस्त की वीडियो मीटिंग के बारे में नहीं बताया गया था.

उन्होंने कहा कि वकील को ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक जेनरेट करना पड़ता है और एक दिन पहले जेल प्रशासन को इसकी जानकारी देनी होती है.

उन्होंने अपने जवाब में कहा कि 11 सिंतबर को पूर्व में दी गई जानकारी के अनुरूप वीडियो लिंक जेल प्रशासन को भेजा गया, लेकिन जेल प्रशासन में से किसी ने भी इस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा नहीं लिया.

बता दें कि जामिया मिलिया इस्लामिया छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष शिफा उर रहमान को दिल्ली दंगों के सिलसिले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया है.

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