बस्तर

दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के संभावित चेहरों पर एक नजर

खबरी चिड़िया @ दंतेवाड़ा विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए कुछ महीने बीते ही थे और लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई। दंतेवाड़ा विधानसभा में भाजपा को चंद हजार वोटों से जीत मिली लेकिन लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान माओवादियों के निशाने पर रहे भाजपा विधायक भीमा मंडावी की सड़क पर आईईडी विस्फोट कर माओवादियों ने हत्या कर दी। जिसकी वजह से यह सीट रिक्त हो गई।

इस हत्याकांड की गूँज पूरे देश में सुनाई दी। मामला विधानसभा में भी गूँजा। अब दुबारा से चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा दंतेवाड़ा की इस महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों को लेकर कई दिनों से मंथन कर रही है।

भाजपा और कांग्रेस में मंडावी और कर्मा परिवार को छोड़कर दूर दूर तक कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आता है। भाजपा के हालात पर नजर डालें तो पार्टी शहीद भीमा मंडावी की पत्नी ओजस्वी मंडावी को अपना प्रत्याशी घोषित कर सकती है । वहीं कांग्रेस से शहीद महेंद्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा उम्मीदवार घोषित की जा सकती हैं।

लेकिन इस सारे समीकरणों के बीच कांग्रेस में कुछ ऐसे भी चेहरे हैं जिन पर पार्टी हाई कमान विचार कर सकता है। जिनमें तीन नाम हमारी जानकारी में सामने आए हैं। जिनमें पहला नाम छविंद्र कर्मा का है जो शहीद महेंद्र कर्मा के सुपुत्र हैं। कुछ दिन पूर्व दंतेवाड़ा दौरे पर पहुँचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से टिकट को लेकर देवती कर्मा और उनके पुत्र छविंद्र कर्मा से चर्चा हुई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक दोनों ओर से कहा गया है कि टिकट का निर्णय पार्टी आलाकमान तय करे। दूसरी ओर कांग्रेस चूँकि सत्ता में है और पिछले विधानसभा चुनाव में दंतेवाड़ा जैसी महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था । बस्तर की सभी सीटें जीतने के बाद भी दंतेवाड़ा की सीट हार जाने का मलाल छत्तीसगढ़ के बड़े कांग्रेसी नेताओं को भी है। जो इस बार दंतेवाड़ा विधानसभा उपचुनाव को किसी भी कीमत पर हारना पसंद तो नहीं करेगा। इसके लिए कांग्रेस पार्टी नए चेहरों की तलाश भी कर रही है।

जिसमें दो नाम उभरकर सामने आए हैं। पहला नाम शंकर कुंजाम का है जो वर्तमान में दंतेवाड़ा जिले के एक पंचायत में सरपंच हैं। दूसरा नाम अमूलकर नाग का सामने आया है। अमूलकर नाग बारसूर नगर पंचायत के अध्यक्ष हैं और विकासखंड की राजनीति में दोनों ही नेता पिछले कई सालों से सक्रिय रहे हैं। शंकर कुंजाम बैलाडीला पहाड़ श्रृंखला की नंदराज पहाड़ी क्षेत्र के लिए चले आंदोलन में काफी चर्चा में रहे थे। वहीं भाजपा ओजस्वी मंडावी से आगे बढ़ ही नहीं पाई है। उनके पास और कोई मजबूत विकल्प दिखाई नहीं देता है।

चूँकि भाजपा पिछले 15 सालों तक सत्ता की पार्टी रही है जिसके कारण कई छोटे बड़े कार्यकर्ता भी टिकट माँगते नजर आते हैं। लेकिन अंततः टिकट किसे मिलता है वह तो पार्टी आलाकमान ही तय करेगा। चुनाव में दोनों ही पार्टियों का उम्मीदवार कौन होगा यह कुछ ही दिनों में सबके सामने होगा।

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