सियासत

यह आदिवासियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं तो और क्या है ?

If this is not the declaration of war against the tribals, then what else?

जब हमें फर्जी राष्ट्रवाद और धार्मिक उन्माद में फंसाकर उलझाया गया था भाजपा और मोदी केवल आदिवासी ही नही सम्पूर्ण देश के हित के खिलाफ जाकर देश की सम्पदा बेचने और पर्यावरण को तहस-नहस करने में जुटे हुए थे । भाजपा सरकार ने भारतीय वन अधिनियम में कई संशोधन प्रस्तावित किये हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य आदिवासी वनाधिकार कानून को निष्प्रभावी करना है. यह कानून आदिवासियों और वनों में परंपरागत रूप से रहने वाले गैर-आदिवासियों के साथ सदियों से जारी ऐतिहासिक अन्याय’ को दूर करने के लिए बनाया गया है.

ये प्रस्तावित संशोधन वन अधिकारियों को बिना किसी जिम्मेदारी के किसी भी व्यक्ति को गोली से मारने, उनके कानूनी अधिकारों को प्रतिबंधित या निरस्त करने, वहां के रहवासियों को उनकी सहमति के बिना विस्थापित करने और वन-क्षेत्रों को कॉर्पोरेट कंपनियों को देने का अधिकार देते हैं. स्पष्ट हैं कि ये प्रस्तावित संशोधन वन अधिकारियों को सेना और सैनिकों को प्राप्त विशेषाधिकारों से भी ज्यादा अधिकार देते हैं.

यह सब इसलिए कि जल, जंगल, जमीन और खनिज जैसे प्राकृतिक साधनों की लूट को सुगम बनाया जा सके और इसके खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज़ को तानाशाहीपूर्ण ढंग से बर्बरतापूर्वक कुचला जा सके. यदि ऐसा होता है, तो यह आदिवासियों के साथ दुबारा ‘ऐतिहासिक अन्याय’ होगा. यह वन-क्षेत्रों में और वहां के रहवासियों के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं, तो और क्या है?

संजय पराते

युद्ध की घोषणा उन्होंने की है, इसे अंजाम तक हमें पहुंचाना है. आईये, अपने संघर्षों को और तेज़ करें.

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