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छत्तीसगढ़

पत्रकार सुरक्षा कानून के ड्राफ्ट पर संयुक्त संघर्ष समिति और सरकार के बीच हुई चर्चा

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खबरी चिड़िया @ रायपुर छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आफताब आलम की अध्यक्षता में गठित समिति ने पत्रकार सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है । समिति ने पत्रकार सुरक्षा कानून के ड्राफ्ट को खुली चर्चा के लिए ओपन कर दिया है । यह छत्तीसगढ़ सरकार के जनसंपर्क विभाग की वेबसाइट में भी उपलब्ध है । इस ड्राफ्ट के प्रावधानों पर पत्रकारों और आम नागरिकों से जस्टिस आलम के नेतृत्व में समिति ने आज रायपुर में “पहुना” में पत्रकारों से और आम नागरिकों से दो दो घंटा अलग-अलग बात की । बातचीत की है प्रक्रिया कल जगदलपुर में और परसों अंबिकापुर में भी जारी रहेगी ।

पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति छत्तीसगढ़ के संयोजक के नाते कन्हैया लाल शुक्ला पत्रकारों के साथ हुई चर्चा में शामिल रहे, साथ ही वे नागरिकों के साथ हुई चर्चा में पीयूसीएल के प्रतिनिधि के रूप में भी शामिल हुए । चर्चा के दौरान पत्रकारों और नागरिकों की ओर से काफी सुझाव आए जिसे जस्टिस आलम ने गंभीरता से सुना और उनकी टीम ने नोट भी किया । ज्यादातर सुझाव पत्रकारों के लिए जिला स्तर पर बनाए जाने वाले रिस्क मैनेजमेंट कमिटी और पत्रकारों के पंजीयन की प्रक्रिया को लेकर थी ।

पत्रकारों की ओर से प्रमुख रूप से कमल शुक्ला, सुधीर तंबोली आज़ाद, अनिल साखरे, नितिन सिन्हा, प्रशांत कानस्कर, अरविंद अवस्थी, शंकर पांडे, केके शर्मा, विद्यानंद ठाकुर, अजित सिंह आदि ने ड्राप्ट के लिए अपना सुझाव दिया , वहीं नागरिकों की ओर से छत्तीसगढ़ पीयूसीएल के डिग्री प्रसाद चौहान, शालिनी गेरा, अखिलेश एडगर, शाहिद अंसारी और कमल शुक्ला ने डॉप्ट पर विस्तृत चर्चा की और सुझाव दिया व 2 साल पूर्व पीयूसीएल द्वारा तैयार किया गया पत्रकार सुरक्षा कानून का ड्राफ्ट भी माननीय आफताब आलम को दिया। पत्रकार सुरक्षा कानून पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री टीएस सिंहदेव के सहयोगी नीलाभ दुबे ने पत्रकारों की ओर से ड्राफ्ट पर काफी महत्वपूर्ण सुझाव दिए । दुबे ने माननीय अध्यक्ष आफताब आलम को पूर्व सरकार में प्रतिपक्ष के नेता की ओर से तैयार निजी बिल का प्रारूप भी प्रस्तुत किया, जिसे उस समय पेश नहीं किया जा सका था ।

पत्रकार सुरक्षा कानून के ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधि और कमेटी के मेंबर के तौर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा, रुचिर गर्ग व जनसंपर्क आयुक्त तारण प्रसाद सिन्हा मौजूद रहे । आज की बैठक से जो निष्कर्ष सामने आया उससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून के ड्राफ्ट को लेकर गंभीर है और उम्मीद है कि बहुत जल्दी कि इसे ईमानदारी पूर्वक लागू किया जाएगा । प्रदेश के उन तमाम साथियों से निवेदन है जिनके पास कोई सुझाव हो तो उसे माननीय आफताब आलम जी और उनके कमेटी के समक्ष जल्द से जल्द प्रस्तुत करें ।

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