बस्तर

आत्मसमर्पित नक्सली पोदिया के साथ डीआरजी जवानों ने मिलकर पोदिया और लच्छू की कर दी हत्या

खबरी चिड़िया @ दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिला अंतर्गत किरंदुल थाना क्षेत्र के गुमियापाल के जंगल में पुलिस द्वारा घोषित मुठभेड़ प्रारंभिक तौर पर ही फर्जी मुठभेड़ प्रतीत हो रही है।

गुमियापाल के मुठभेड़ मामले में दंतेवाड़ा पुलिस ने मुठभेड़ में पाँच-पाँच लाख के दो ईनामी नक्सलियों को मार गिराने का दावा किया था। अब इस मुठभेड़ को चश्मदीद और सामाजिक कार्यकर्ता फर्जी बता रहे हैं। मामले में ग्रामीणों से बातचीत में यह बात निकलकर सामने आ रही है कि गुमियापाल में कोई मुठभेड़ की घटना नहीं हुई है। गाँव के दो आदिवासियों पोदिया और लच्छू की पुलिस ने हत्या कर दी है।

सोनी सोढ़ी, लिंगा राम कोड़ोपी, बेला भाटिया और हिड़मे मड़काम ने एक प्रेस रिपोर्ट भी जारी किया है। जिसमें आदिवासियों की फर्जी मुठभेड़ में हत्या किए जाने के प्रमाण गिनाए गए हैं। दंतेवाड़ा पुलिस की ओर से जिन दो आदिवासियों पोदिया और लच्छू मंडावी को 5-5 लाख इनामी नक्सली बताया गया है वे ग्रामीण हैं। ये नंदराज पहाड़ बचाने की लड़ाई भी प्रमुख रूप से लड़ने वालों में से थे। इन्हें नक्सली बताकर पुलिस ने गाँव से उठाकर कहीं ले जाकर हत्या कर दी है।

इनका कहना है कि गाँव के तीन ग्रामीण चश्मदीद गवाह हैं जिनके मुताबिक पाँच लोग जिसमें पोदिया और लच्छू भी शामिल थे गाँव के नजदीक स्कूल के पास बैठकर शराब पी रहे थे। इस दौरान 15-20 सुरक्षा बल के जवान आ धमके और पुलिस वालों ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। इन आदिवासियों को पुलिस वाले गाँव से सड़क की ओर खींचकर ले जाने लगे। इनमें से दो लोग भागने में सफल रहे। जबकि पोदिया और लच्छू को पुलिस वालों ने गाँव से ले जाकर मार डाला। जाँच दल ने इस पूरे मामले में सरकार से निष्पक्ष जाँच की मांग करते हुए दोषी पुलिस जवानों और अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में एक ग्रामीण अजय तेलाम को पुलिस तो अपने साथ लेकर गई। लेकिन उसकी फर्जी मामलों में आत्मसमर्पण कराया, गिरफ्तार कर जेल भेज दिया या उसे फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी यह पुलिस ग्रामीणों को नहीं बता रही है ।

हमने माओवादी नेताओं से कुछ समय पूर्व पोदिया नाम के नक्सली के बारे में पूछताछ की थी। पोदिया कौन हैं इस बारे में जानने के हम भी इच्छुक थे क्योंकि दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक ने पिछले एक मुठभेड़ के बाद पोदिया नाम के नक्सली का भी जिक्र किया था। जिसको सरेंडर करने और सरेंडर नहीं करने पर मुठभेड़ में मार देने की बात हमसे पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव द्वारा कही जा रही थी। सोनी सोरी से भी इस आशय पर बातचीत में पोदिया के बारे में जिक्र कर एसपी दंतेवाड़ा ने आत्मसमर्पण करने और नहीं करने की दशा में मार दिए जाने की बात कही थी।

माओवादियों ने पोदिया के बारे में हमसे बातचीत में बताया था कि पोदिया नाम के सैकड़ों ग्रामीण आपको इस इलाके में मिल जाएंगे। कइयों के सरनेम भी एक दूसरे से मिलते हैं।

लेकिन जनताना सरकार के मलांगिर एरिया में एक ही माओवादी नेता हुआ करता था। जिसके जंगल की जनताना सरकार में रिकार्ड अच्छे नहीं थे। जिसे जनअदालत में समझाइश देकर छोड़ दिया गया था। हालांकि उसे भी अन्य संघम सदस्यों की तरह ही कोई हथियार नहीं दिया गया था। उन्होंने आगे बताया था कि बाद में जनताना सरकार के कठोर कानूनों के तहत सजा के डर से उसने इलाके से भागकर दूसरे अपराधी नक्सलियों की तरह ही पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। ये ऐसे अपराधी थे जो यहाँ भी सीपीआई (माओवादी) पार्टी में रहकर अपराधों को अंजाम देते थे और अब भी पुलिस के साथ मिलकर आदिवासियों की हत्या कर रहे हैं।

हमारी पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि डीआरजी के स्थानीय पुलिस में वे हार्डकोर अपराधी नक्सली भी होते हैं जो कभी माओवादियों के साथी रहे हैं जिनकी जनताना सरकार में किये गए उनके अपराधों की सजा के भागीदार थे या सजा के डर से भागकर लोकतांत्रिक सरकार में आत्मसमर्पण कर दिया था। बाद में भाजपा की सरकार में इन सैकड़ों अपराधों के आरोपी नक्सलियों को फिर से हथियार देकर अपराध करने छुट्टा सांड की तरह छोड़ दिया जाता था। इन पर आदिवासियों के साथ बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के अब भी आरोप लगते रहे हैं।

एक माओवादी नेता ने मुठभेड़ के बाद कारतूस और हथियार मिलने के हमारे सवाल के जवाब में कहा था कि उत्तरप्रदेश और बिहार से आने वाले पुलिस अफसरों के लिए हथियार और कारतूस का इंतजाम करना कौन सा बड़ा काम है, पत्रकार बाबू।

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