बस्तर

सुकमा में माओवादियों ने जल जंगल जमीन की लड़ाई में पाँच वाहन जलाए

पोकलेन जिसे माओवादियों ने आग के हवाले कर दिया

खबरी चिड़िया@ सुकमा बस्तर में माओवादियों की लोकतांत्रिक सरकार से लड़ाई का अंत अनंत की ओर अग्रसर है। माओवादी किसी भी सूरत में आदिवासियों के कथित जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को छोड़कर जाने का मन तो बनाते दिख नहीं रहे हैं। अलबत्ता उनकी इस लड़ाई में जनता का ही नुकसान हमेशा दिखाई देता रहा है। माओवादी सड़क निर्माण कार्य के विरोधी रहे हैं और निर्माण कार्य में लगे वाहनों को आग के हवाले कर देते हैं । इन घटनाओं को अंजाम देने को लेकर माओवादी यही तर्क देते हैं कि सड़क बनने से पुलिसिया तंत्र उनके सुरक्षित ठिकानों पर हमला करेगा और आदिवासियों की जिंदगी तबाह कर देगा।

ताजा मामला सुकमा जिले के वंजम गाँव का है जहाँ माओवादियों ने पाँच वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादियों के हमले सरकारी तंत्र पर सरकार बदलने के बाद भी लगातार जारी है। आज भी माओवादियों ने पाँच वाहनों को आग के हवाले कर दिया है। जिसमें दो पोकलेन, दो जेसीबी मशीन और एक ट्रेलर शामिल है।

माओवादियों ने इस ट्रेलर में लगाई आग

सुकमा पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक माओवादियों ने सड़क निर्माण में लगे वाहन चालकों और मजदूरों की पिटाई भी की है। जिनका प्राथमिक उपचार गोलापल्ली कैम्प में किया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण का काम पुलिस की सुरक्षा में शिव शक्ति कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा किया जाना था । किंतु आज पुलिस द्वारा सुरक्षा नहीं दी गई फिर भी सड़क निर्माण कार्य जारी था। शायद इसकी भनक माओवादियों को किसी तरह लग गई। जिसका खामियाजा कंस्ट्रक्शन कंपनी को उठाना पड़ा और उसके वाहनों को जलाने के साथ ही वाहन चालकों और मजदूरों की पिटाई माओवादियों द्वारा की गई ।

यह सड़क कोंटा से गोलापल्ली, महता, बंडा और मुरलीगुड़ा को जोड़ने वाला पुराना सड़क मार्ग है। जिसे तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय ही बनाया जा रहा था। किंतु सरकार बदलने और भाजपा सरकार की नक्सल उन्मूलन की बेतहाशा खर्चे वाली बेफिजूल नीतियों का अंजाम बस्तर को भुगतना पड़ा और यह सड़क माओवादियों के कब्जे वाले इलाकों में गिना जाने लगा। पिछली भाजपा सरकार की नीतियों के कारण माओवादियों का साम्राज्य हजार गुना तक बढ़ गया। सलवाजुड़ुम आंदोलन को सरकारीकरण कर भाजपा सरकार ने माओवादियों को संजीवनी दिया और भाजपा सरकार आदिवासियों के कत्लेआम का तमाशा देखती रही। इस घटना में आगजनी की पुष्टि एएसपी शलभ सिन्हा ने भी की है।

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