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बस्तर में सीआरपीएफ कैम्प से गुजरने पत्रकारों के लिए सरकार जारी करे अधिमान्य आईकार्ड

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गणेश मिश्रा: लेखक बीजापुर में एक समाचार पत्र में ब्यूरो चीफ की हैसियत से पत्रकारिता कर रहे हैं। वार जोन बस्तर में नक्सल और पुलिस की लड़ाई में आदिवासियों के ऊपर हो रहे अत्याचार की रिपोर्टिंग करने वाले गणेश मिश्रा नक्सल मामलों के एक्सपर्ट हैं।

बस्तर के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिले में जिला मुख्यालय व ब्लाक मुख्यालयों में कार्यरत् विभिन्न समाचार पत्र, इलेक्टॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार, स्टींगरों को तय मापदंड के अनुसार अधिमान्यता दिलाने की दिशा में जल्द कार्रवाई होनी चाहिए।

चूंकि माओवादग्रस्त इन जिलों में रिपोर्टिंग के दौरान आए दिन अर्द्धसैन्य बल के जवानों द्वारा पत्रकारों को पत्रकार मानने से इंकार कर दिया जाता है। शनिवार की दोपहर ऐसी ही एक घटना मेरे और मेरे पत्रकार साथी के साथ हुई। बीजापुर से पंद्रह किमी दूर चेरपाल गांव में हम मौजूद थे, इसी दौरान गष्त से लौट रही सीआरपीएफ की एक टुकड़ी को लीड कर रहे अफसर ने हमसे हमारा परिचय पूछा। नाम और काम दोनों बताने के बाद वे आईकार्ड दिखाने की मांग करने लगे, हमारे अपना परिचय पत्र उन्हें सौंपा गया तो तल्ख लहजे में जनाब ने कहा कि इस तरह का आईकार्ड तो कोई भी और कही भी बना बना सकता है। जब मैने कहा कि ये मुझे मेरे संस्था ने जारी किया है आप चाहे तो तस्दीक कर लो तो उन्होंने दीगर शहरों में कार्यरत् पत्रकारों और उनके आईडी प्रुफ का हवाला देते प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो यानि पीआईबी का जिक्र करते हुए आईडी प्रुफ को सही मानने से इंकार कर दिया और बकायदा हम पर संदेह जताते आईडी प्रुफ और हमारी गाड़ी की तस्वीर खींचने का आदेश अपने जवान को दिया गया हालांकि एक बारगी वह अफसर अपनी ड्यूटी पूरी जरूर कर रहा था मगर मेरा सवाल सीआरपीएफ के उच्चाधिकारियों से है कि जब उनके अधीनस्थ अफसर हमारे आईडी प्रुफ को फर्जी मानते हैं तो सीआरपीएफ के सिविक एक्शन से लेकर तमाम पब्लिक वेलफेयर कार्यक्रम में हमें बुलाया क्यों जाता है और किस आधार पर कल की घटना के बाद मैं किस नजरिए से इसे लूं यह समझ से परे हैं। अतएव सीआरपीएफ के उच्चाधिकारियों से मेरा निवेदन है कि कल को अगर आपका सिविक एक्शन कार्यक्रम बगैरा बगैरा हो तो आप अधिमान्य पत्रकारों को बुलाए, क्यों कि बीजापुर जिले में जो भी स्थानीय मीडियाकर्मी है उनके पास अधिमान्यता वाला आईडीप्रुफ नहीं है भले ही वो सालों से दुर्गम और कठिन परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करते आ रहे हो, उनके पास आईडी प्रुफ उसी संस्था का है जिस संस्था में वे कार्यरत् है, चूंकि आप के ही अफसर संस्था प्रदत्त आईडी प्रुफ को फर्जी मानते हैं, इसलिए आगे से अधिमान्य पत्रकारों को अपने कार्यक्रमों में बुलाए।

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