बस्तर

आदिवासियों के दैविक पहाड़ को बचाने की लड़ाई में शामिल हुए विधायक विक्रम मंडावी

बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी के साथ आप नेता बल्लू भवानी, प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी

खबरी चिड़िया @ दंतेवाड़ा आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को कभी नक्सलियों का प्रेरित आंदोलन बताने वाले लोगों को अब समझ लेना चाहिए कि यह लड़ाई केवल आदिवासियों की अपनी लड़ाई है | जिसका तमाम राजनैतिक और गैर राजनैतिक लोगों का समर्थन मिला है| गुरुवार को निकले आदिवासियों ने शुक्रवार ०७ जून को आन्दोलन शुरू किया| इस आन्दोलन को आज और गति मिली जब बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी इस आन्दोलन में आदिवासियों का साथ देने पहुँचे| वे आज ही गर्मियों की छुट्टीयाँ परिवार के साथ बिताकर पोर्टब्लेयर से लौटे थे |

बीजापुर आने के बाद विधायक एवं बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विक्रम मंडावी आज शनिवार सुबह सीधे दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला में आन्दोलनरत आदिवासियों से मिलने और आन्दोलन को समर्थन देने निकल पड़े| विक्रम आदिवासियों के जल, जंगल व जमीन के हक की लड़ाई के लिए चल रहे बैलाडीला में आन्दोलन को समर्थन देने पहुँचे थे| विक्रम मंडावी ने अपने आदिवासी भाइयों से कहा है कि वे आदिवासियों के पहाड़ किसी भी कंपनी को देने के खिलाफ हैं और आदिवासियों की इस लड़ाई को किसी भी सूरत में लड़ने के लिए तैयार हैं|

मंडावी ने कहा है कि नौ रत्न कंपनियों में शामिल भारत में लौह अयस्क खनन में महारत हासिल राष्ट्रिय खनिज विकास निगम (NMDC) पिछले 60 सालों से यहाँ लौह अयस्क का खनन कर रही है| पहले से ही जिस क्षेत्र में खुदाई चल रही है उसका लोहा तो ख़त्म कर लें फिर दुसरा पहाड़ खोदें| ऐसे में पहाड़ को निजी कंपनियों के हाथों में दिया जाना स्थानीय जनता की सांस्कृतिक विरासत को ख़त्म करना है | केंद्र सरकार इस मसले को हल्के में न ले नहीं तो उग्र आंदोलन होगा| आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए हम विरोध करते रहेंगे| आन्दोलन को समर्थन देने बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, आम आदमी पार्टी नेता बल्लू भवानी और सोनी सोढ़ी भी पहुँची थी|

जानिये क्यों सही है आदिवासियों की यह लड़ाई

आदिवासियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहाड़ियों में से एक किरंदुल के 13 नंबर डिपोजिट की पहाड़ी ही है | जिसे बचाने की खातिर 200 गाँव के ग्रामीण पैदल चलकर आन्दोलन में शामिल होने पारंपरिक हथियारों से लैस होकर पहुँचे हैं| आदिवासीयों का मानना है कि इस पहाड़ को इष्ट देव गुरु नंदराज की धर्मपत्नी पितोड़ी रानी के बिराजमान हैं| जो सम्पूर्ण आदिवासियों की इष्ट देवी हैं| आदिवासी समुदाय प्रमुख और पत्रकार और फिल्म कलाकार मंगल कुंजाम बताते हैं कि 13 नंबर की पहाड़ी जिसे अडानी ग्रुप को दी गई है| यह आदिवासियों के प्राकृतिक शक्ति का केंद्र है| यहाँ किसी भी सूरत में उत्खनन करने आदिवासी समुदाय नहीं देगा| पितोड़ी रानी बस्तर महाराजा प्रवीर चाँद भंजदेव की भी इष्ट देवी हैं| जिसकी सेवा करने महाराज ग्रीष्मकाल में आकाशनगर की पहाड़ियों में जाते थे| आकाशनगर 11 बी और 14 की पहाड़ियों के मध्य नन्द राज विराजमान हैं| जो आदिवासियों के प्रमुख देवता हैं| पहाड़ियों में प्राकृतिक गुरु नंदराज की दो बेटियों इलो और पालो का भी वास है | ऐसे में प्रकृति पूजक आदिवासियों का गुस्सा होकर आन्दोलन करना जायज प्रतीत होता है|

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