बस्तर

गोंडेरास में मुठभेड़ नहीं, पुलिस ने निर्दोष ग्रामीण और निहत्थे नक्सली को पकड़कर गाँव वालों के सामने मारी गोली: साईनाथ

  • माओवादी प्रवक्ता साईनाथ ने माना पुलिस ने जिस पुनेम की हत्या की थी वह उनकी साथी
  • एक और आदिवासी की हत्या को बताया निर्दोष ग्रामीण

खबरी चिड़िया @ बस्तर गोंडरास मुठभेड़ को माओवादियों ने फर्जी बताया है, आरोप लगाया है कि महिला नक्सली पुनेम सीको को जिंदा पकड़ने के बावजूद गांव वालों के सामने गोली मारी गयी है साथ ही सोए हुए लोगों पर गोली चलाई गई ।

मीडिया को जारी विज्ञप्ति में दरभा डिवीजन कमेटी के सचिव साईंनाथ ने बताया है कि पुलिस ने उस दिन कैम्प में सो रहे साथियों को चारों तरफ से घेर कर अंधाधुंध गोली बारी की और झरना की ओर नित्य क्रिया के लिए गए पुनेम सीको उर्फ राधा को दौड़ाकर पकड़ लिया फिर उसे गांव वालों के सामने लाकर गोली मार दी । साईंनाथ ने पुलिस जवानों पर ग्रामीणों के साथ निर्मम मारपीट और लूट पाट करने का भी आरोप लगाया है । 37 ग्रामीणों के गंभीर रूप से घायल होने की बात करते हुए बताया कि जवानों ने लोगो के घरों में घुस कर रुपये और खाने पीने के समान छीन लिए ।

विज्ञप्ति में बताया गया है कि पुलिस ने केवल पुनेम की लाश ही ले गए, मगर घोषणा दो के मारे जाने की है । साईंनाथ ने आशंका व्यक्त की है कि गांव से 12 लोगों को पकड़ कर ले जाया गया है , तो इन्ही में से किसी की हत्या कर दी गई होगी । उन्होंने दूसरे मृतक के नाम की घोषणा करने और लाश ग्रामीणों को सौंपने की मांग की है ।

इसके साथ ही साईंनाथ ने 2 मई को हुए मुठभेड़ को भी फर्जी बताते हुए आरोप लगाया है कि मारा गया निहत्था आदिवासी मुया अरनपुर का निवासी था । वहीं अरनपुर निवासी जिस हिड़मा को 8 लाख का ईनामी बताकर पकड़ा गया है वह भी सामान्य ग्रामीण हैं । जिन 12 ग्रामीणों को पुलिस बिना गिफ्तारी घोषित किये उठा लाई है उनके नाम भी इस विज्ञप्ति में जारी किए गए हैं । इन ग्रामीणों के नाम माड़वी कोमडाल , सोढ़ी लखमा , मुचाकी भीमा , मुचाकी आयता , कवासी भीमे , सोढ़ी भीमा , सोढ़ी हिड़मा , माड़वी भीमा , मड़कम जोगा , गोंचे जोगा , गोंचे भीमा और सोढ़ी देवा है , जिन्हें रिहा करने की मांग की गई है ।

साईंनाथ ने कहा है कि बस्तर की जनता कार्पोरेट लूट और जल जंगल से अपनी बेदखली के खिलाफ एकजूट हो रही है। इसीलिये छत्तीसगढ़ पुलिस जनता में दहशत फैलाने की कोशिश कर रही है । विज्ञप्ति में बुद्धिजीवियों व लोकतंत्र पर विश्वास रखने वालों से अपील की गई है कि वे कथित फर्जी मुठभेड़ और फर्जी गिरफ्तारियों का विरोध करें ।

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