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दंतेवाड़ा भूमि घोटाले के आरोपी ओम प्रकाश चौधरी मामले की जाँच करा रही है सरकार

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खबरी चिड़िया @ नईदिल्ली विधानसभा चुनाव के समय आईएएस की नौकरी छोड़कर चर्चा में आए ओमप्रकाश चौधरी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दंतेवाड़ा में जमीन घोटाले की आँच में उनसे खरसिया विधानसभा चुनाव भी हाथ से निकल गया। अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर छत्तीसगढ़ सरकार जाँच कर कर रिपोर्ट सौंपेगी।

जानकार बताते है कि इस मामले में पूर्व भाजपा सरकार ने विधि आयोग के तत्कालीन अघ्यक्ष की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जाँच समिति गठित कर प्रकरण की जाँच का जिम्मा दिया था। कमेटी अपना प्रतिवेदन नहीं दे पाई थी, कि सुप्रीम कोर्ट से रोक का हल्ला हो गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद प्रकरण कि जाँच का रास्ता साफ हो गया है।

राज्य शासन ने इसके लिए प्रमुख सचिव रेणु जी. पिल्लै को दंतेवाड़ा जमीन घोटाले की जाँच की जिम्मेदारी सौंपा है। इस आशय का आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने गत दिनों जारी किया है। इस घोटाले में पूर्व आईएएस अफसर ओपी चौधरी समेत चार लोगों की संलिप्तता बताई जा रही है। बताते है कि इस प्रकारण में जाँच के आदेश हाईकोर्ट ने दिए थे। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट की रोक का हवाला देकर जाँच रोक दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों एक आदेश में कहा है कि कोर्ट ने कभी भी जाँच पर रोक नही लगाई है। इसके बाद सरकार ने जाँच कराने के लिए कदम उठाए और प्रमुख सचिव रेणु जी. पिल्लै को इस प्रकरण के जाँच का जिम्मा सौंपा।

यह प्रकरण 2011 से 2013 के बीच का है। जब ओपी चौधरी दंतेवाड़ा में कलेक्ट्रेट के बगल में 2010 में एक किसान बैजनाथ से 4 लोंगो ने मिलकर 3. 67 एकड़ कृषि भूमि खरीदी। इसमें मोहम्मद शाहुल हमीद, कैलाश गुप्ता, मुकेश शर्मा और प्रशांत अग्रवाल शामिल थे। 2011 में चौधरी दंतेवाड़ा कलेक्टर बन कर आए। सन 2013 में राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, पटवारी और एसडीएम ने मिलकर सिर्फ 15 दिन के भीतर इन चारों की निजी जमीन को बदले में सरकारी भूमि देने कि प्रकिया पूरी कर डाली। उस दौरान बताया गया कि इस जमीन को विकास, भवन के नाम पर लेकर दंतेवाड़ा में बस स्टैंड के पास करोड़ों कि व्यावसायिक जमीन से इसकी अदला-बदली कर दी गई। मात्र एक दिन के भीतर ही जमीन बेचने का परमिशन और नामांतरण संबंधी प्रकिया पूरी कर ली गई ।


विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी के नेेेता संंकेेत ठाकुुुर ने पूर्व कलेक्टर और भाजपा नेता ओपी चौधरी पर इस घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाया था। आप नेता का आरोप था कि अदला- बदली करके करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार किया गया। इस मामले को भाजपा सरकार ने दबा दिया। आप नेता का आरोप था कि भ्रष्टाचार के आदेश के बाद भी इस मामले कि जाँच नही हुई। इस अदलाबदली के खेल में सरकारी खजाने को भारी क्षती पहुंचाई गई। मामला जब कोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने सितम्बर 2016 में राज्य सरकार को आदेश दिया कि इस पुरे प्रकरण कि जाँच की जाए।

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