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छत्तीसगढ़

इस्तीफा नहीं, महाधिवक्ता कनक तिवारी को हटाकर सतीश चंद्र वर्मा की नियुक्ति

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  • महीने भर से इस्तीफे का अफवाह व ड्रामा
  • कल मुख्यमंत्री और कानून मंत्री ने मीडिया के सामने स्वीकारा
  • कनक तिवारी ने इस प्रक्रिया को बताया संवैधानिक पद का अपमान

खबरी चिड़िया @ रायपुर महाधिवक्ता कनक तिवारी केे इस्तीफे पर फैली अफवाहों पर विराम लग गया है। महीने के कार्यकाल के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने 31 मई को महाधिवक्ता कनक तिवारी को उनके इस्तीफा नही दिए जाने के बावजूद हटाकर उनकी जगह अतिरिक्त महा अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को नियुक्त कर दिया है । इस आशय के आदेश आज राज्यपाल कार्यालय से जारी भी हो गए हैं ।

महीने भर से कांग्रेस और सरकार के भीतर से ही महाधिवक्ता के संवैधानिक पद को लेकर इस्तीफे की अफवाह उड़ाई जाती रही थी। पिछले दो दिनों में तो हद पार कर दी गई। कानून मंत्री खुलेआम कहते रहे कि कनक तिवारी जी ने खुद ही काम करने से मना कर दिया है। मुख्यमंत्री सफाई देते रहे कि स्वास्थ्यगत कारणों से कनक तिवारी जी का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया गया। जबकि कनक तिवारी जी सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया में घोषणा करते रहे कि वे स्वस्थ हैं और उन्होंने त्यागपत्र दिया ही नहीं तो कैसे स्वीकार कर लिया गया ?

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि ऐसा लग तो रहा है कि कनक तिवारी जी और सरकार के बीच किसी बात को लेकर महीने भर से कोई विवाद था। उन्हें कई दिनों से मनाया जा रहा था कि कनक तिवारी जी स्वयं इस्तीफा दें । लेकिन इस्तीफे की अफवाहों का अंत उचित ढंग से नही हुआ। वे प्रदेश के न केवल सबसे विद्वान वरिष्ठ वकील और राजनीति व साहित्य के ज्ञाताओं में से एक हैं। बल्कि कांग्रेस के वैचारिक नेतृत्वकर्ता होने के साथ तार्किक रूप से अपनी बात रखने के लिए भी जाने जाते हैं । अगर उन्होंने किसी बात पर सरकार को सलाह दी होगी, या उनके मन मुताबिक कोई काम करने से इनकार किया होगा तो निश्चित रूप से यह कांग्रेस के भले के लिए और न्यायिक दृष्टि से अपमानजनक होने की वजह से ही हुआ होगा। इस बात का कोई न कोई समाधान मुख्यमंत्री और उनके राजनीतिक सलाहकारों को निकालना ही था ।

प्रदेश सरकार के इस निर्णय को लेकर कांग्रेस के कई नेता और मंत्री भी चकित हैं । एक महिला नेता ने सोशल मीडिया में लिखा है कि सम्भवतः कल कनक तिवारी जी मुख्यमंत्री से मिलेंगे। तभी कुछ पता चल पाएगा । इस मामले को लेकर यह तो स्पष्ट है कि यह कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और खींचतान का नतीजा है। इस मामले पर नई सरकार की अपरिपक्वता साफ दिख रही है। इससे सरकार की किरकिरी तो होगी ही छवि भी खराब होगी। ज्ञात हो कि सतीश चन्द्र वर्मा पिछली सरकार के समय वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा के खिलाफ बनाये गए कई आपराधिक मामलों में इनकी ओर से न्यायालय में पैरवी कर चुके हैं ।

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