बस्तर

नक्सलगढ़ में निर्विध्न चुनाव सम्पन्न कराया, स्कूल जाकर पढ़ाया, फिर गाँव लौट रहे गुरुजी नदी में बह गए

जोगेश्वर नाग @ बारसूर छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर में शिक्षक किन परिस्थितियों में काम करते हैं। इसका अंदाजा इसी बात से आप लगा सकते हैं कि बारसूर से लगे मांडेर नदी में शिक्षा की आहुति देने वाले राजू गुरुजी नदी में बह गए। गुरुजी का क्या हुआ अभी तक पता नहीं चल पाया है। मांडेर नदी में राहत और बचाव दल के साथ बारसूर पुलिस उनके शरीर की तलाश में बुधवार को सुबह 10 बजे गई और शाम 04 बजे लौट आई।

जो खबर मिली है उसके अनुसार मंगलवार की देर शाम साढ़े 5 बजे के आसपास गुरुजी राजू राम कश्यप मुचनार के माध्यमिक शाला से पढ़ाकर अपने घर झारावाया गाँव की ओर लौट रहे थे। रास्ते मे पड़ने वाले मांडेर नाला (नदी) में बने स्टॉप डेम को पार करते समय हादसे में शायद वे लापता हो गए हैं। बुधवार की सुबह गाँव के सरपंच और एक शिक्षक दोनों अल सुबह बारसूर थाने पहुँचे जहाँ उन्हें घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

बचाव दल के साथ बारसूर पुलिस मांडेर नाला (इंद्रावती की सहायक नदी) की बुधवार की सुबह 10 बजे निकला जहाँ नदी में गुरुजी की तलाश शाम 04 बजे तक की गई और कल शाम लौट आई।

खबर है कि गुरुजी की ड्यूटी विधानसभा उपचुनाव सम्पन्न कराने के लिए कटेकल्याण में लगाई गई थी। नक्सलियों की मांद कटेकल्याण क्षेत्र में निर्विध्न चुनाव सम्पन्न कराकर लौटे राजू गुरुजी ने मुचनार स्थित अपने स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर शाम करीब साढ़े 05 बजे अपने गृहग्राम झारावाया लौट रहे थे। रास्ते में मांडेर नदी पड़ती है जिसमें उनके डूब जाने की खबर है।

कांग्रेस भाजपा और कथित माओवादियों की सरकारों ने मिलकर गुरुजी की जान को आफत में डाल दिया। कांग्रेस भाजपा के कथित विकास के झूठे दावों ने एक कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक की ले ली।

सौम्य स्वभाव के राजू के माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं। राजू गुरुजी की एक बड़ी बहन देवली कश्यप है जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। सरकारों और अफसरों को क्या फर्क पड़ता है। कोई राजू गुरुजी जीये या मरे। घटना को आज तीन दिन होने को है। मौके पर कोई बड़ा अफसर अब तक नहीं पहुँचा है। गीदम तहसीलदार दीपिका देहारी एवं बारसूर थाना प्रभारी सावन सारथी भी कल बुधवार शाम 04 बजे लौट आये। रेस्क्यू टीम भी कल शाम 04 बजे ही लौट आई। लेकिन गाँव के लोगों ने हार नहीं मानी वे रात भर अपने प्रिय गुरुजी को तलाश करते रहे।

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