बस्तर

सुरक्षा में तैनात सिपाही हम पर ही कर रहे अत्याचार, पुलिस कैम्प हटाइए सरकार

एलाड़मड़गु कैम्प हटाने लामबंद हूए चार गाँव के ग्रामीण जवानों पर लगाया गंभीर आरोप

  • कोलाईगुड़ा गाँव में जमा हूए दर्जनों ग्रामीणों ने कैम्प हटाने की नारेबाज़ी दोषी जवानों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की
  • जवानों पर मनमर्ज़ी मुर्ग़ा बकरा लूटकर ले जाने का भी आरोप

जवानों के ख़ौफ़ से पाँच परिवार का हूआ पलायन: ग्रामीण

खबरी चिड़िया @ दोरनापाल पहुँचविहीन इलाक़े में बीते वर्ष अक्टूबर माह में नक्सल ऑपरेशन मे तेज़ी लाने एवं इलाक़े में सड़क निर्माण में सुरक्षा के लिए खोले गए एलाड़मड़गु गाँव के कैम्प का विरोध तेज़ हो गया है। पुरे मामले पर गंभीर आरोप लगाते हूए ग्रामीणों ने जल्द से जल्द गाँव से कैम्प हटाने समेत ग्रामीणों से मारपीट लूटपाट का आरोप लगाते जवानों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की माँग की है। मामला सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र का है। जहाँ के एलाड़मड़गु गाँव के पुलिस कैम्प के जवानों पर ग्रामीणों ने मारपीट लूटपाट समेत कई गम्भीर आरोप लगाया है। वही पुलिस जवानों की पिटाई के चलते पाँच परिवारों के ग्रामीणों के पलायन करने का भी आरोप लगाया है।

एलाड़मड़गु कैम्प हटाने की माँग को लेकर सुकमा जिले के कोलाईगुड़ा गाँव में चार गाँवों के ग्रामीण एकत्रित हूए और कैम्प हटाने की माँग को लेकर जमकर नारेबाज़ी की वही ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्रामीणों की कई एकड़ ज़मीन पर कैम्प बना दिया गया है। जिससे ग्रामीण परिवार खेती नहीं कर पा रहा है। वही जल्द से जल्द कैम्प को हटाने की माँग ग्रामीण कर रहे है; और कार्यवाही की भी माँग की जा रही है। ग़ौरतलब है कि सुकमा जिले के भेज्जी थाना क्षेत्र का यह इलाक़ा नक्सलियों के कोर ज़ोन के रूप मे जाना जाता है और बीते वर्ष एलाड़मड़गु गाँव के पास सड़क निर्माण के दौरान जवानों पर नक्सलियों के हमले के बाद उस इलाक़े में सड़क का निर्माण रूक सा गया है। जिसके बाद एलाड़मड़गु मे कैम्प खोला गया है। इलाक़े में नक्सल अभियान में और भी गति लाना भी कैम्प खोलने का उद्देश्य रहा है। किन्तु इस बार उस इलाक़े के ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाते हूए कैम्प हटाने की माँग पर अड़ गए हैं और जल्द ये जल्द छत्तीसगढ़ सरकार से कैम्प हटाने की माँग कर रहे हैं। वही कैम्प के विरोध में आसपास के चार गाँवों के ग्रामीण एकत्रित हूए थे। जिनमें एलाड़मड़गु, बोदराजपदर, विराभट्टी एंव मोसलमड़गु गाँव के ग्रामीण शामिल हैं ।

जवानों के ख़ौफ़ से ग्रामीणों के पलायन का आरोप

ग्रामीणों ने पहली बार जवानों के ख़ौफ़ से ग्रामीणों के पलायन का भी आरोप लगाया है और कहाँ है की पूर्व मे 60 परिवार एलाड़मड़गु में निवास करते थे पर कैम्प खुलने के बाद से पाँच परिवारों का गाँव से पलायन हो गया है। अब 55 परिवार ही गाँव में रह रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस जवानों पर कई गंभीर आरोप लगाया है। जिनमें घरों से ग्रामीणों के मुर्ग़े बकरे आदि लूट कर ले जाने और विरोध करने पर थोड़े पैसे देकर ग्रामीणों को डरा धमका कर भगाने का भी आरोप है।

कैम्प खुलने के बाद से 75 लोगों की हूई पिटाई

एलाड़मड़गु में कैम्प खुलने के बाद अक्टूबर 2018 से अब तक 75 ग्रामीणों की बेदम पिटाई करने का आरोप ग्रामीणों ने जवानों पर लगाते हूए कहा है कि जब से कैम्प खुला है आए दिन ग्रामीणों को बेवजह पिटा जाता है। जवान कैम्पों से निकल कर गाँव मे दाखिल होते है और ग्रामीणों की पिटाई शुरू कर देते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बालटी में एक ग्रामीण की मौत नक्सली पर्चा उठाने के दौरान ब्लास्ट से हूई है। जबकि उक्त ग्रामीण ने पर्चा लगाने की सुचना कैम्प में भी दिया था। जवानों ने उसी से ज़बरन पर्चा उठाने को कहा और ब्लास्ट हो गया।

कैम्प भी हटे और दोषियों पर कार्यवाही भी हो

नक्सली कोर ज़ोन कहे जाने वाले कोलाईगुड़ा की बैठक में ग्रामीणों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द कैम्प हटाने की माँग की है और ग्रामीणों ने इलाक़े में उत्पात मचाने वाले जवानों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करने की भी माँग की है ग्रामीणों का कहना है की इलाक़े का पुरा माहौल ख़राब हो गया है। जिससे सभी लोग परेशान है।

कैम्प खुलने से नक्सलियो पर ज़बरदस्त दबाव: शलभ

सुकमा एएसपी आईपीएस शलभ सिन्हा ने पुरे मामले पर कहा है कि जब से एलाड़मड़गु में कैम्प खुला है। नक्सलियों पर ज़बरदस्त दबाव पड़ा है। कैम्प खुलने के बाद से जवानों की इलाक़े के ग्रामीणों से काफ़ी बेहतर संबंध बने है। समय समय पर ग्रामीण कैम्प में आते हैं और जवानों से सम्पर्क मे रहते हैं जिससे नक्सलवाद से उस इलाक़े में ग्रामीणों का भरोसा उठता जा रहा है। यही वजह है कि नक्सलियों द्वारा ज़बरन ग्रामीणों को कैम्प हटाने के लिए एकत्रित होने का दबाव बनाया जा रहा है फिर भी इस पुरे मामले की जाँच कराई जाएगी।

Most Popular

To Top
Open chat