बस्तर

कीड़े वाला खाना खिलाने वाला प्राचार्य कहता है ये जंगल के बच्चे हैं ये झरने नाले का पानी पीते हैं इन्हें ऐसे ही रहने दो

  • शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार की गहरी जड़े
  • शिक्षाकर्मी बना प्रिंसिपल तो अनुदेशकों को बनाया अधीक्षक
  • भ्रष्टाचार और बदहाल शिक्षा व्यवस्था में अध्यापकों की संदिग्ध भूमिका
  • जाँच से पूर्व ही संतोष प्रधान ने अपने प्राचार्य पद से इस्तीफा दिया

खबरी चिड़िया @ दंतेवाड़ा आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा के विधार्थी अपने छात्रावास में जेल से बदतर जिन्दगी गुजारने को मजबूर हैं| भाजपाइयों के राज में बदहाल शिक्षा व्यवस्था कांग्रेस राज की शुरुआत के बाद भी नहीं सुधरी है| इस खबर को संज्ञान में लेकर जब दंतेवाड़ा की पूर्व विधायक कद्दावर कांग्रेसी महिला नेत्री देवती कर्मा ने अपनी टीम के साथ छात्रावास का जायजा लिया तो उन्हें भी गंदगी और बदबू से दो चार होना पड़ा| छात्रावास की घटिया व्यवस्था को सुधारने का आश्वासन तो दिया है पर इसको अमलीजामा पहनाया भी जाएगा इस पर संशय की स्थिति है|इनके साथ भाजपा नेता राजेश कश्यप भी मौजूद थे|

इसके पीछे काफी सारी वजहें सामने आ रही है| कभी दंतेवाड़ा जिले में नकल के लिए कुख्यात गीदम ओपन स्कूल परीक्षा केंद्र प्रभारी संतोष प्रधान को पूर्व मंत्री महेश गागड़ा का करीबी होने का फायदा उन्हें दिलाया गया| सारे नियमों को दरकिनार कर एक शिक्षाकर्मी को आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा का प्राचार्य नियुक्त कर दिया गया| संतोष के करीबी बताते हैं कि संतोष प्रधान भैरमगढ़ में महेश गागड़ा का बेहद करीबी हुआ करते थे| मंत्री बनने के बाद मित्रवत महेश गागड़ा ने उन्हें विवादास्पद ओपन स्कूल के प्रभारी से सीधे हटवाकर जिले के सबसे महत्वपूर्ण संस्था आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा का प्राचार्य बनवा दिया|

 आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा के बच्चे कहते हैं कि उन्हें कई महीने कपडे धोने का सर्फ़ नहीं मिलता है, उन्हें चादर कम्बल देने के बाद वापस ले लेते हैं| दर्जनों पंखे खराब होने की शिकायत है| उसे ठीक नहीं कराते हैं| कपडे धोने की मशीन महीनों से खराब है, बच्चों को अपने कपने खुद ही धोने पड़ते हैं| बच्चे वाटर फ़िल्टर खराब होने की शिकायत करते हैं तो प्राचार्य ये जवाब देते हैं कि “ये आदिवासी जंगल के बच्चे हैं ये झरने नाले का पानी पीते हैं इन्हें ऐसे ही रहने दो”| छात्रावास के बच्चे बताते हैं कि चावल कभी छांट कर बनाया ही नहीं जाता है खाने की गुणवत्ता जेल के कैदियों के सामान है|

पुरे छात्रावास में गन्दगी का अम्बार लगा रहता है एजुकेशन सिटी जावंगा के छात्रावास में छत से पानी टपकता है| टॉयलेट का पानी भी बाहर बहता रहता है, स्वीपर का पोस्ट है लेकिन स्वीपर पदस्थ नहीं किया गया है| वहीँ की एक बुजुर्ग महिला है जिससे कुछ पैसे देकर कलेक्टर दर पर स्वीपर का काम कराया जाता है बुजुर्ग महिला अकेले इतने बड़े कैम्पस के गुसलखाने को रोजाना सफाई नहीं कर पाती है| इस महिला को टॉयलेट सफाई सम्बन्धी सुरक्षा के दस्ताने और मास्क भी उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं| छात्र-छात्राओं के बिस्तरों से दुर्गन्ध आती है| इस व्यवस्था से बच्चे हमेशा बीमार रहते हैं | खुजली की बिमारी बच्चों में आम है| कई महीनों से खुजली की बिमारी से परेशान चार बीमार बच्चों को बेहतर ईलाज के लिए 29 जुलाई को ही जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा ले जाया गया है| पहले अधिकतर बीमार बच्चों को घर भेज दिया जाता था|

आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा में अस्थाई शिक्षक जिन्हें सरकार अनुदेशक कहती है, जिनसे पाँच हजार मानदेय देकर चौबीस घंटे काम लिया जाता रहा है| अब इनका मानदेय जरुर सात हजार कर दिया गया है| ऐसे अनुदेशकों को संतोष प्रधान प्राचार्य ने अपने प्रभाव में आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा के जूनियर और सीनियर चारों छात्रावासों में अधीक्षिक बनाकर बैठा रखा हैं | जिनमें पूर्णिमा राठौर सीनियर गर्ल्स, मानसिंह सीनियर बॉयज, कृपाशंकर जूनियर बॉयज, श्यामबती जूनियर गर्ल्स के बच्चों की अधीक्षिका हैं| यहाँ काम करने वाले शिक्षकों को भुगतान की भी शिकायत है | वे बताते हैं कि उपर से (डीएमएफ मद) से हमें भुगतान के लिए राशि तो ठीक ठाक आती है लेकिन हमें निर्धारित राशि से कम भुगतान किया जाता रहा है| यहाँ शिक्षक से लेकर चपरासी तक सारे अस्थाई कर्मचारी हैं| केवल प्राचार्य ही शिक्षाकर्मी नीतियों के तहत नियमित हो चुके हैं|

जिले में कई काबिल प्राचार्य हैं लेकिन नकल के लिए कुख्यात ओपन स्कूल गीदम के विवादास्पद परीक्षा केंद्र प्रभारी संतोष प्रधान को आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा का प्रभार दिया गया| संतोष प्रदान के करीबियों का कहना है कि इनकी महेश गागड़ा पूर्व मंत्री निवासी भैरमगढ़ से दोस्ती थी| भैरमगढ़ में संतोष भी पले बढे हैं| पूर्व मंत्री ने अपने चहेते मित्र को मित्रवत आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा का प्रभार दिलाया था| जिले के कुछ प्रमुख भाजपाइयों का इस विधालय में प्राचार्य के कमरे में दिन भर मजमा लगा रहता है|

 संतोष प्रधान ने नव नियुक्त आश्रम अधिक्षिका  को पूर्ण प्रभार तक नहीं दिया है। आश्रम की हालात से कांग्रेसी नेता देवती कर्मा से शिकायत करने भाजपा के आदिवासी नेता भी आ रहे थे। सूत्र बताते हैं कि बहुत कम समय में संतोष प्रधान ने काफी अधिक संपत्ति अर्जित कर ली है| कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा लगाकर यह उनका चहेता बन गये हैं| जिला शिक्षा अधिकारी चाह कर भी इन पर कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।

आस्था विधा मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल जावंगा में पढने वाली एक बच्ची चांदनी जो घोटपाल के समीप नागुल ग्राम की निवासी है| इस बच्ची के साथ कुछ महीने पहले भयंकर हादसा हुआ था| जब वह छुट्टी के दिन थाली और प्लेट धो रही थी| बच्ची को गाड़ी ने जोरदार टक्कर मार दी थी जिसकी वजह से उसके कमर में गंभीर चोंट आई थी| जिसका ईलाज कलेक्टर से मदद लेकर किया जा रहा है| मिली जानकारी के मुताबिक़ बच्ची के ईलाज के लिए प्राचार्य संतोष प्रधान ने शहर के जनप्रतिनिधियों से चन्दा भी लिया था | बच्ची के साथ हादसा मामले में दंतेवाड़ा कोर्ट में केस भी चल रहा है|

यहाँ प्राचार्य ने अपने तरीके का पहली बार निविदा जारी किया है| जिसमें कई साधारण कंपनियों के मसाले और घी जैसे उत्पादों की दर मंगाई गई है| इस सूची से ही ज्ञात होता है कि यहाँ निम्न गुणवत्ता वाले भोज्य पदार्थ बच्चों को दिए जाते रहे हैं| इससे पहले कभी भी यहाँ किराने की खरीदी के लिए निविदा जारी नहीं किया गया। सवाल यह भी है कि अधीक्षिका की नियुक्ति होने बाद प्राचार्य ने मनमर्जी करते हुए केवल खाद्य पदार्थों के लिए बाजार से निविदा मंगवाई है जबकि ऐसे सामानों जिनमें गणवेश के लिए जूते, ड्रेस, कपड़े, कंबल, चादर, गद्दे आदि की खरीदी हेतु निविदा बुलाये ही नहीं गये हैं| जिनकी खरीदी करोड़ो की लागत से होनी है| सवाल यह भी है कि शिक्षा सत्र करीब दो माह बीत चूका है अब निविदा जारी करने का उदेश्य क्या है|

सूत्र बताते हैं कि यहाँ अनाज की खरीदी ज्यादातर उस दूकान से होती थी जहाँ भाजपाई नेताओं का प्रभाव है| फ़र्जीवाड़ा कर जिला पंचायत उपाध्यक्ष बने मनीष सुराना के पैत्रिक दूकान से ज्यादातर खरीदारी होने की भी चर्चा है| सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने आस्था विधा मंदिर में हुए पुरानी खरीदी के बिलों की जाँच करने की माँग उठाई है| शाम होते होते हमें यह खबर मिली है कि जाँच से पूर्व ही पूर्व भाजपाई मंत्री महेश गागड़ा के करीबी संतोष प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है| हमने संतोष से उनका पक्ष जानने बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया|

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