छत्तीसगढ़

इस बार भी सत्ता परिवर्तन के लिए भाजपा के खिलाफ मतदान करें

रायपुर @ खबरी चिड़िया देश के मतदाताओं से नागरिकों ने अपील की है कि “इस बार भी सत्ता परिवर्तन के लिए भाजपा के खिलाफ मतदान कीजिये”। 17 वीं लोकसभा के लिए आपको अपना सांसद चुनना है। 2014 में विदेशों में जमा काले धन को वापसी, भय मुक्त शासन, सबका साथ सबका विकास किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य, उनके कर्जों की माफी प्रति वर्ष दो करोड़ रोजगार पैदा करने आदि नारों के साथ नरेंद्र मोदी को जनता ने समर्थन दिया।

परंतु सरकार बनने के बाद वादों पर अमल करने की जगह मोदी सरकार ने स्वर्गीय जवाहर लाल नेहरू से लड़ाई शुरू करते हुए देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी अवधारणा पर हमले शुरू कर दिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समता समानता प्रेम और भाईचारे की बात करने वाले गोविंद पानसरे नरेंद्र दाभोलकर प्रोफेसर कलबुर्गी और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या कथित हिंदुत्व के कट्टर लोगों द्वारा किया गया।अनेक लेखकों बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित करने की शुरुआत हुई। जिसके कारण संस्कृति कर्मियों लेखकों बुद्धिजीवियों ने उन्हें दिए गए पुरस्कार वापस किया। विदेशों से काला धन लाने और जनता तक 15 लाख रुपए देने को भाजपा अध्यक्ष ने जुमला कहा। उसके बाद नोट बंदी जनता पर कहर बनकर आया जिससे किसान और दिहाड़ी मजदूर आज तक उबर नहीं सका है।

करोड़ों लोगों के हाथ से उनकी आजीविका छिन गई वहीं सैकड़ों लोग बैंकों की कतार में शहीद हो गए। भ्रष्टाचार से लड़ने के नाम पर सत्ता में आई भाजपा खुद भ्रष्टाचार का पर्याय बन गई।नोट बंदी के दौरान सत्ता के गलियारों से जुड़े लोगों के नाम काले धन को सफेद करने पुराने नोटों को थोक में (सैकड़ों करोड़ रुपए) नये नोटों से बदलने के प्राथमिक सबूत मिले परंतु मोदी सरकार ने उनकी गहरी जांच नहीं किया खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे पर 16000 गुना संपत्ति वृद्धि के आरोप लगे परन्तु उनकी कोई जांच नहीं हुई।

अभी हाल में बेरोजगारी वृद्धि दर के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं जो बतलाते हैं कि आजादी के बाद देश में पहली बार बेरोजगारी वृद्धि दर बढ़कर दहाई अंकों को पार कर गई जिसका मतलब हुआ अकेले एक साल में बेरोजगारों की संख्या ब्रिटेन और फ्रांस की आबादी से ज्यादा हो गई। चुनाव को काले धन से मुक्त कर पारदर्शी चुनाव प्रणाली विकसित करने की जगह मोदी सरकार ने चुनावी बांड नियम बना काले धन के चुनाव में उपयोग को आसान कर दिया।अभी सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनावी बांड से मिले 210 करोड़ रुपयों में से 210 करोड़ रुपए अकेले भाजपा को मिले।यह इस बात को भी सिद्ध कर रहा कि भाजपा जनता के लिए नहीं वरन् चंद अमीरों और मित्र उद्योगपतियों के लिए काम कर रही है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने विदेश यात्राओं में जितना धन खर्च किया इस उम्मीद में कि निवेश आएगा, आंकड़े बतला रहे कि मोदी के पांच सालों में सबसे कम विदेशी निवेश आए और हमारा आयात निर्यात से बहुत अधिक रहा जिससे व्यापार घाटा बढ़ा और रुपए की कीमत कम होती चली गई।इसी तरह देश के संघीय ढांचे को ध्वस्त करते हुए राज्यों के वित्तीय अधिकार को सीमित करते हुए बिना किसी व्यापक तैयारी के मोदी सरकार ने जीएसटी लागू कर दिया। आज भी जीएसटी सामान्य व्यापारी को छोड़िए अच्छे अच्छे विशेषज्ञों को भी समझ में नहीं आ रहा क्योंकि उसे जितने दिन लागू हुए हैं उससे कहीं ज्यादा संशोधन हो चुके हैं और अभी भी सरकार यह कहने तैयार नहीं कि यह अंतिम संशोधन है। जीएसटी के चलते आज भी हम आपको दोहरा कर देना पड़ रहा है। बड़े कारपोरेट दिया हुआ कर वापस पा लेते हैं लेकिन हमने जो डबल टेक्स दिया है वह हमें वापस नहीं होता।

दवाईयों सहित आवश्यक वस्तुएं लगातार मंहंगी मिल रहीं हैं। जीएसटी ने न सिर्फ राज्यों को और गरीब बना दिया वरन् लोककल्याण कारी कामों के लिए धन का अभाव पैदा कर दिया है। जिसके चलते राज्य शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक सांस्कृतिक संस्थाओं में एक खास विचारधारा के लोगों को बैठाया गया है। आईआईटी जैसे संस्थानों में ज्योतिष और गोमूत्र पर शोध थोपने के नतीजे देश में वैज्ञानिक शोध कम हो जाएगा और विज्ञान के क्षेत्र में हम फिर से पश्चिम का मुंह ताकने लगेंगे।मोदी सरकार ने आधारभूत स्वाथ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जगह अपने उद्योगपति मित्रों के बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने स्वाथ्य क्षेत्र को बीमा और निजी अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया है। इससे भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।स्मार्ट कार्ड से हुए भ्रष्टाचार से आप भली-भांति परिचित हैं।

बीएसएनएल रेल सहित तमाम सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने उद्दत सरकार देश पर बोझ बन गई है।गाय के नाम पर भीड़ की हिंसा और हत्याओं में शामिल सत्ताधारी दल के लोग प्रत्याशियों के जुलूसों में आगे आगे देखे गए हैं। देश के तमाम हिस्सों में दलितों पर संगठित हमले हुए उनकी हत्याएं हुई हैं।

आज तक इन अपराधियों पर मुकदमे तक शुरू नहीं हुए हैं सजा तो बहुत दूर की बात है। मोदी सरकार के वायदों के विपरीत जनता पर हमलों से उप चुनावों में भाजपा हारते चली गई और 2018 के विधानसभा चुनावों में उसके हांथ से मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान निकल गए। लोकसभा चुनाव में आसन्न हार से बौखलाई मोदी सरकार ने युद्धोंमाद फैलाते हुए गंभीर सुरक्षा चूक और गृहमंत्रालय द्वारा बलों को हवाई रास्ते गंतव्य तक पहुंचाने से इंकार के कारण हुए पुलवामा आतंकवादी हमले( जिसकी सारे देश ने निंदा किया) पर राजनीति शुरू कर दिया और विपक्ष को देशद्रोही पाकिस्तानी सहित न जाने क्या क्या कह डाला। चुनाव आचार संहिता का खुलेआम धज्जियां उड़ाते खुद की फिल्म और चेनल शुरू कर दिया। चुनाव आयोग ने बंद करने निर्देश दिया परन्तु उसे चालू रखा कि उसे नोटिस नहीं मिला।

विकास और सुशासन के मुद्दे पीछे छूट गए हैं और धार्मिक सांप्रदायिक आधार पर विपक्ष पर हमले किए जा रहे हैं। 8 पूर्व सेनाध्यक्ष और 150 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर चुनाव में सेना के उपयोग पर चिंता जताते हुए इसे तुंरत बंद करने की अपील किया है।प्रश्न है क्या एक ऐसी सरकार को जो अपने ही कानूनों को मानने से इंकार करे उसे दोबारा मौका देंगे।क्या ऐसी सरकार को दोबारा मौका देंगे जो अपने ही नागरिकों के साथ धर्म जाति क्षेत्र भाषा के आधार पर भेदभाव करे।क्या हम देश को एक व्यक्ति से छोटा बनने देंगे, नहीं न, तो अपने आप को देश से बड़ा और आलोचकों को देशद्रोही कहने वाले को हम वोट नहीं देंगे।

जो राफेल सौदे को देश से छिपाए और सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोले उसे हम कैसे वोट दे सकते हैं।हम वोट देंगे प्रेम भाईचारा बढ़ाने हम वोट देंगे युवाओं के लिए रोजगार पैदा करने वाले को,हम वोट देंगे जल जंगल जमीन और आदिवासियों के आत्मसम्मान की रक्षा करे।हम वोट देंगे जो डाक्टर बाबा साहेब आंबेडकर का सम्मान करें और आरक्षण में सभी के साथ न्याय करे , जो देश के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक समाजवादी संविधान की रक्षा करे।

आइए अपने वोट को सार्थक करें। सांप्रदायिक विघटनकारी झूठे जुमले बाज मोदी सरकार को परास्त करें। हम देश के उन तमाम संस्कृति कर्मियों लेखकों बुद्धिजीवियों पूर्व नौकरशाह राजदूत और चुनाव आयुक्त की उस आव्हान
से अपनी सहमति जताते है जिन्होंने मोदी सरकार को वोट नहीं देने की अपील किया है।

हम आपके साथी.

आनंद मिश्रा , वरिष्ठ समाजवादी विचारक

के ए अंसारी, वरिष्ठ अधिवक्ता बिलासपुर

नंद कुमार कश्यप, मार्क्सवादी विचारक

प्रथमेश मिश्रा, पर्यावरण विद्

सोनी सोरी, सामाजिक कार्यकर्ता, बस्तर

आलोक शुक्ला, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन

तुहिन देब, सांस्कृतिक कर्मी और लेखक रायपुर

लिंगा राम कोडोपी, पत्रकार, बस्तर क्षेत्र

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

राजेन्द्र स्याल, सामाजिक कार्यकर्ता महासमुंद

शिवनाथ केशरवानी, बिलासपुर

बी आर कौंशिक, बिलासपुर

प्रियंका शुक्ला, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता

अनुज श्रीवास्तव, पत्रकार और रंगकर्मी

नागेश्वर मिश्रा, आम आदमी पार्टी

रवी बेनर्जी, सचिव माकपा बिलासपुर

सुब्रत चट्टोपाध्याय, ट्रेडयूनियन

लखन सुबोध, गुरूघासीदास सेवादार संघ केन्द्रीय संयोजक

पवन शर्मा, भाकपा बिलासपुर

निकिता अग्रवाल, अधिवक्ता बिलासपुर

शाकिर अली, लेखक एवं साहित्यकार जनवादी लेखक संघ

शौकत अली, अधिवक्ता आल इंडिया लायर्स यूनियन

सादिक अली, अधिवक्ता रायपुर

एपी जोसी, मानव अधिकार कार्यकर्ता रायपुर

राजिम तांडी, महिला अधिकार मंच

अखिलेश एडगर, सामाजिक कार्यकर्ता रायपुर

पुष्पा कलाप्रेमी, गीतकार एवं रेला कलेक्टिव भिलाई

कलादास डेहरिया, ट्रेडयूनियन एवं जनवादी कवि लेखक रेला कलेक्टिव भिलाई

गीत डेहरिया, रंगमंच कलाकार

विभीषण पात्रे, दलित अधिकार मंच पामगढ

विजय भाई, भारत जन आंदोलन रायपुर

रमाकांत, किसान नेता राजनांदगांव

निलोत्पल शुक्ला, सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर

शालिनी गेरा, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता कांकेर

ईशा खंडेलवाल, अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता बिलासपुर

गणेश कछवाह, ट्रेडयूनियन कांसिल रायगढ

तेज राम साहू, ट्रेड यूनियन लीडर

अजय टीजी, फिल्मकार भिलाई

जोनस तिर्की, सामाजिक कार्यकर्ता जशपुर

दीपिका, महिला अधिकार कार्यकर्ता पंडरिया

गायत्री सुमन, अधिवक्ता एवं एक्टविस्ट बिलासपुर

गौतम बंदोपाध्याय, नदी घाटी मोर्चा रायपुर

गिरीश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता कोरिया

गुड्डू लेहरे, दलित अधिकार कार्यकर्ता

जनकलाल ठाकुर, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा दल्लीराजहरा

कमल शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार जांजगीर

कपूर वासनिक, जनवादी लेखक संघ बिलासपुर

केशव सोरी, सामाजिक कार्यकर्ता कांकेर

प्रसाद राव, सामाजिक कार्यकर्ता भिलाई

श्रेया, महिला अधिकार कार्यकर्ता रायपुर

सोनसिंग झाली, अधिवक्ता जगदलपुर

एस आर नेताम, आदिवासी नेता रायपुर

राज कुमार सोनी, वरिष्ठ पत्रकार अपना मोर्चा रायपुर

हबीब खान, वरिष्ठ पत्रकार बिलासपुर

उत्तम कुमार, संपादक दक्षिण कोसल राजनांदगांव

अनुभव सोरी, आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता कांकेर

दिव्या जायसवाल, अधिवक्ता बिलासपुर

ईश्वर निर्मलकर, जन मुक्ति मोर्चा दल्लीराजहरा

जीत नियोगी, जन मुक्ति मोर्चा दल्लीराजहरा

डा. सत्यभामा अवस्थी, सामाजिक कार्यकर्ता बिलासपुर

शेख अंसार, सीएमएम रायपुर

डा. लाखन सिंह, मानवाधिकार कार्यकर्ता बिलासपुर


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