बस्तर

किरंदुल में हिरोली के ग्रामीणों ने बयान में कहा फर्जी थी ग्रामसभा

मंगल कुंजाम @ किरन्दुल फर्जी ग्राम सभा की आज तीसरी मर्तबा जाँच होनी थी। जिसके लिए किरन्दुल नगर के अम्बेडकर भवन में जिले के अफसर और हिरोली गाँव लोग पहुँचे थे।

फर्जी ग्राम सभा की जांच का मामला यह है कि विगत 07 जून को आदिवासियों ने अपनी देवी-देवता के विराजमान पर्वत को उद्योगपत्तियों और एनएमडीसी को खनन के लिए दिए देने के विरोध में तीन जिले से आदिवासियों ने हुंकार रैली और अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन कर फर्जी ग्राम सभा का विरोध करते हुए लीज रद्द करने की माँग सरकार से की थी।

इसके बाद जिला प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा आंदोलनकारियों को उनकी दो शर्त मानकर आंदोलन स्थगित करवा लिया था। जिसके तहत फर्जी ग्राम सभा की जांच 15 दिवस में किया जाना था तथा पेड़ों की कटाई और जो भी काम चल रहा था उस पर तत्काल रोक लगाया गया। इसमें एनएमडीसी और एनसीएल की जॉइंट वेन्चर कंपनी ने अडानी इंटरप्राइजेज को 25 साल के लिए लौह अयस्क निकालने के लिए माइनिंग लीज ठेका में दिया था। अडानी के ठेकेदारों द्वारा खनन स्थल पर वनों की कटाई की जा रही थी। तभी एक बड़ा आन्दोलन संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के द्वारा हजारों आदिवासियों के साथ एनएमडीसी प्रशासनिक भवन के सामने सात दिनों तक अनिश्चितकालीन हड़ताल किया गया था। इस आन्दोलन में माँग की गई कि फर्जी ग्रामसभा आयोजित करने और कराने वाले संबंधित अधिकारियों पर कानूनी करवाई किया जाये और पहाड़ पर वनों की कटाई तत्काल रोक दी जाए।

छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासियों की मांगों पर विचार करते हुए वनों की कटाई का काम चल रहा था उस पर तत्काल रोक लगा दी। 15 दिवस के अंदर फर्जी ग्राम सभा की जांच दो मर्तबा टलने के बाद आज 16 जुलाई 2019 को हुई जिसमें केवल 29 ग्रामीणों ने किरंदुल पहुँचकर अपना बयान दर्ज कराया है।

अधिकारियों के समक्ष ग्राम सभा मामले में अपना बयान दर्ज कराने पहुँचे गुड्डी कुंजाम ने बताया कि मेरा भी नाम सचिव द्वारा 2014 की ग्रामसभा में उल्लेखित है। उस समय मैं कुआकोंडा होस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उस वक्त मेरी उम्र 18 साल भी नहीं थी। मैं पढ़ा-लिखा हूँ, मैं अंगूठा क्यों लगाऊंगा। गाँव के सचिव और कंपनी के अधिकारी पूरा फर्जी ग्रामसभा रिपोर्ट तैयार कर यहां प्रस्ताव पास किये हैं। मैंने अपने बयान में कहा है कि हमारे गाँव में कोई ग्राम सभा नहीं हुई है।

आज की ग्रामसभा जांच में संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के 15 सदस्यों को भी शामिल किया गया था और इस जांच में शामिल आदिवासी नेता बल्लू भवानी ने बताया है कि हम लोग जांच के वक्त मौजूद थे। जितने भी लोगों का बयान हमारे समक्ष दर्ज किया गया है सभी लोगो ने 2014 में कोई भी ग्रामसभा नहीं होने की बात अपने बयान में दर्ज कराई है जबकि सबसे पहले उस वक्त के पंचायत सचिव बसन्त नायक का बयान दर्ज किया गया जब जांच अधिकारी ने सचिव से ग्रामसभा के सम्बन्ध में पूछा तो उन्होंने ग्रामसभा हुई है ऐसा तो जरूर कहा है लेकिन कोई सरकार का आदेश नहीं था और कोई नोडल अधिकारी भी इस ग्रामसभा के लिए सरकार की तरफ से नहीं आया था। सचिव ने कहा है कि एनएमडीसी के अधिकारियों के द्वारा बार-बार दबाव बनाया जा रहा था। तब ग्रामसभा का प्रस्ताव पास कर मैंने ही दिया था। सचिव के बयान के आधार पर देखे तब भी ग्रामसभा फर्जी प्रतीत हो रही है और इस जांच का परिणाम हमारे पक्ष में आने की उम्मीद है जिसकी आधी लड़ाई हम जीत चुके हैं।

अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे हिरोली ग्राम के तत्कालीन सचिव रहे बसन्त नायक ने बताया कि हिरोली में ही ग्रामसभा का प्रस्ताव पास किया गया था और सरपंच ने खुद अपना हस्ताक्षर किया है पर इस ग्रामसभा के लिए कोई सरकार का आदेश नहीं मिला था। एनएमडीसी के अधिकारियों ने मुझपर बार-बार दबाव बनाकर यह सब करवाया था। तब मैंने लिखकर दिया था कोई फर्जीवाड़ा मेरे द्वारा नहीं किया गया है सारे गाँव के लोगों के सामने ही प्रस्ताव पासकर मैंने दिया था।

यह वहीं तत्कालीन ग्राम सचिव बसन्त नायक हैं, जिन्हें पिछले कई महीनों से जिला प्रशासन खोज रही थी। इसे लेकर प्रदेश के वनमंत्री मोहम्मन्द अकबर ने एक न्यूज चैनल में दावा किया था कि यह गायब हैं। जिसके बाद आब जाकर आज अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे है।

फर्जी ग्राम सभा पर आज आदिवासी नेता मनीष कुंजाम

इस ग्राम सभा के लिए बनाए गए जांच अधिकारी दंतेवाड़ा एसडीएम नूतन कुमार कंवर ने बताया की 29 लोगों का बयान दर्ज किया गया है बाकि बचे हुए लोगों का भी बयान जिला प्रशासन और राज्य सरकार के आला अधिकारियों को सूचना देने के पश्चात ही बयान दर्ज किया जाएगा। जिला प्रशासन भी चाहता है शीघ्र जाँच कर हम सरकार को रिपोर्ट सौंप दें।

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