अभिव्यक्ति

जहाँ पुलिस जाने से डरे वहाँ से पत्रकार ने निकलवाई नेता की लाश, उसे आईएएस दे रहा पीटने की धमकी

  • जिस पत्रकार ने दो दिन पहले पूरी दिलेरी एक जनप्रतिनिधि के लाश को जंगल से बाहर निकाला
  • आज उसी पत्रकार को एक आईएएस अधिकारी पीट देने की धमकी दे रहे

रानू तिवारी @ जगदलपुर ये Mukesh Chandrakar हैं। अभी कुछ दिनों पहले जब बीजापुर में सपा नेता संतोष पुनेम की हत्या हुई थी और फोर्स घटनास्थल तक नहीं पहुंची तो इन्होंने अपनी दिलेरी दिखाते हुए उनके शव को जंगल से बाहर निकालने में मदद की थी। उनके इस काम की सर्वत्र प्रशंसा भी हुई पर अब जब उन्होंने प्रधानमंत्री के बड़े प्रोजेक्ट में से एक ओडीएफ मतलब हर घर मे शौचालय बनाने पर हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर ख़बर की तो जिले के एक आईएएस अधिकारी की आंखों के किरकिरी बन गए।

अधिकारी ने आव देखा न ताव, बस अपने कार्यालय में बुलाकर लगे फ़ज़ीहत करने। मामला यहीं नहीं रुका बताया जा रहा है कि उन्होंने इनका व इनके साथियों के मोबाइल व कैमरे भी जब्त कर लिए और कहा कि उन्हें मारा जाएगा और जेल भी भेज दिया जाएगा। अब सवाल ये है कि जब बस्तर में कलेक्टर अगवा हो, जवान अगवा हो, ग्रामीण को नक्सली उठा ले जाएं या किसी नेता की हत्या कर जंगल मे लाश फेंक दें तो वहां अपनी जीवटता दिखाकर जो पत्रकार आगे जाए और सरकार की मदद करे तो उसी पत्रकार के साथ इसी सरकार के नुमाइंदे इस तरह का दुर्व्यवहार कैसे कर सकते हैं।

प्रदेश में सरकार बदल गई तो कहा गया पत्रकारों से व्यवहार भी बदल जायेगा, पर देख लीजिए साहेब यहां तो स्थिति बद से बदतर हुई जा रही है। मुख्यमंत्री साहब आपने अपने कहे अनुसार किसानों का कर्जा माफ कर दिया पर कहीं इन आईएएस अधिकारी को माफ कर अपने जुबान से मुकर न जाइयेगा। अगर ऐसा हुआ तो कहीं फिर कभी कोई पत्रकार अपनी जान जोख़िम में डालकर शायद ही किसी की मदद कर पाए या नक्सलियों के चंगुल में फंसे किसी निर्दोष को बचाने खुद जंगल चला जाये ऐसा शायद ही होगा।

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