बस्तर

पत्रकार मंगल कुंजाम की हत्या का क्यों इन्तजार कर रही दंतेवाड़ा पुलिस, सरकार तत्काल मुहैया कराये जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा

दंतेवाड़ा के आदिवासी पत्रकार मंगल कुंजाम

दंतेवाड़ा: माओवाद प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा से मंगल कुंजाम उन चुनिन्दा पत्रकारों की फेहरिस्त में शामिल हैं जो मूल रूपेण आदिवासी पत्रकार हैं और एक्टिविस्ट जर्नलिज्म के लिए सुविख्यात हैं. यही वजह थी कि उन्हें राजकुमार राव की फिल्म न्यूटन में भी एक पत्रकार की भूमिका मिली. लेकिन उनके माओवादियों द्वारा हत्या की साजिश को अंजाम दिए जाने की ख़बरों ने उनके चाहने वालों के बीच खलबली मचा दी है. वही पत्रकार जगत में मंगल कुंजाम की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता व्यक्त की जा रही है.

राजकुमार राव की फ़िल्म की शूटिंग के दौरान पत्रकार मंगल कुंजाम

मंगल कुंजाम के मुताबिक़ किरन्दुल थाना प्रभारी ने उन्हें फोन पर कहा है कि दरभा डिविजन सचिव ने जान से मारने का फ़रमान जारी कर दिया हैं. अब दंतेवाड़ा जिले की पुलिस उनको सुरक्षा दिए जाने की जगह माओवादियों के द्वारा हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाने का क्यों इन्तजार कर रही है, यह समझ से परे है.

न्यूटन फ़िल्म की शूटिंग के दौरान पत्रकार मंगल कुंजाम

मालुम हो कि बस्तर में आदिवासियों की आवाज बुलंद करने के कारण मंगल कुंजाम पर सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर उन्हें नक्सलवाद के चक्रव्यूह में फ़साने की साजिश रचने का सिलसिला काफी पुराना रहा है. जब बस्तर में आईजी एसआरपी कल्लूरी की तैनाती थी, तब नक्सल मामलों में फंसाने की साजिश मंगल कुंजाम के खिलाफ उस दौर में भी रची जा रही थी.

न्यूटन फ़िल्म की शूटिंग के दौरान पत्रकार मंगल कुंजाम

मंगल कुंजाम बताते हैं कि “ दंतेवाड़ा में कमलोचन कश्यप एसपी थे और आईजी एसआरपी कल्लूरी तब उस दौरान उनको अपने पत्रकार मित्र ने सुचना दी थी कि भाई सावधान रहो, पुलिस आपको गिरफ्तार करने की साजिश रच रही है”

इन साजिशों के पीछे की वजह मंगल कुंजाम बताते हैं कि यह उनकी निष्पक्ष जन-पत्रकारिता का परिणाम है जिसके लिए उन्हें माओवादियों के जनताना सरकार इलाके में जाकर रिपोर्टिंग करनी पड़ती है जिसके कारण पुलिस और नक्सलियों के कुकृत्यों की जानकारी आम जनता तक पहुँचती है.

मंगल कुंजाम का कहना है कि बस्तर में पत्रकार दोधारी तलवार के बीच फंसे हैं. उनके खिलाफ जो ख़बरें पुलिस और नक्सलियों की तरफ से आ रहीं हैं वह किसी बड़े साजिश की ओर इशारा करती हैं. जो माओवादियों और पुलिसिया तंत्र के बीच की कड़ी हो सकती है. जिसके चक्रव्यूह में उन्हें फंसाकर उनकी हत्या को अंजाम दिया जा सकता है.

नक्सलियों द्वारा पत्रकार मंगल कुंजाम के रिश्तेदारों की बीते 15 सालों से हत्या हो रही है. आप शायद भूल चुके हों लेकिन मंगल कुंजाम बताते हैं कि ये उन दिनों कि बात है जब बस्तर में सलवा जुडूम का दौर था. उस दौरान देश के कुख्यात नक्सली नेताओं में से एक बदरू उर्फ़ संजय पोटाम ने अपने नक्सली साथियों के साथ मिलकर पत्रकार मंगल कुंजाम के बुआ के लड़के की जघन्य हत्या कर दी थी. राजकुमार मिडियामी गाँव का होनहार युवा था उसने 26 वर्ष की आयु में अपने गाँव गुमियापाल की तस्वीर बदलने की क्या ठानी, आदिवासियों को प्रताड़ित करने वाले कुख्यात माओवादी नेता बदरू उर्फ़ संजय पोटाम ने उनकी हत्या कर दी थी.

इस हत्याकांड से मंगल कुंजाम का परिवार तो तबाह हुआ लेकिन हत्याकांड को अंजाम देने वाले कुख्यात माओवादी नेता बदरू उर्फ़ संजय पोटाम ने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया. सरकार ने इन हत्याओं में केस चलाने की बजाय आत्मसमर्पण नीति का लाभ देते हुए हत्यारोपी संजय को पहले आरक्षक फिर प्रधान आरक्षक से होते हुए आज निरीक्षक तक आउट ऑफ़ टर्न पदोन्नत करती रही है. बदरू उर्फ़ संजय पोटाम पर छत्तीसगढ़ सरकार में कई सारे अपराध दर्ज थे. आज वह डीआरजी दंतेवाड़ा में इंस्पेक्टर है.

इसी महीने की 01 जुलाई को पत्रकार मंगल कुंजाम के जीजा मिट्ठू मरकाम निवासी मड़कामीरास उम्र 38 वर्ष की हत्या माओवादियों ने कर दी थी. स्वर्गीय मिट्ठूराम एनएमडीसी किरन्दुल में एल-2 पद पर कार्यरत थे. मिट्ठू पर नक्सलियों ने उनके मामले में दखल देने का आरोप लगाया था.

पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव कमल शुक्ला कहते हैं कि “मंगल कुंजाम और रमेश कुंजाम दोनों भाई उस गाँव से ताल्लुक रखते हैं जो पुलिस की नजर में भी और आज तक जो घटनाएं हुई उससे कहा जा सकता है कि वह माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र रहा है. दोनों जागरूक युवा हैं और आदिवासी समुदाय के बहुत सारे आन्दोलनों में इनकी सक्रीय भागीदारी रहती है, पत्रकारिता में भी भागीदारी रहती है. निश्चित रूप से इस गाँव से ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति इस गाँव से सामाजिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप कर रहा है, पत्रकारिता में हस्तक्षेप कर रहा है, तो बस्तर में ऐसे सारे लोगों के लिए पुलिस की तरफ से और नक्सलियों की तरफ से ख़तरा रहता है. इसलिए मंगल कुंजाम और रमेश कुंजाम के सुरक्षा की जवाबदारी पुलिस की है. जैसे की मंगल कुंजाम के परिवार के कई सदस्यों की नक्सलियों ने हत्या की है उस तरह से मंगल कुंजाम की भी हत्या हो सकती है और पुलिस की जानकारी में यह बात है, उसके बाद भी मंगल कुंजाम की हत्या होती है तो पुलिस को जवाबदार माना जाएगा. ऐसे गाँव से माओवादी एक तो किसी बच्चे को शिक्षित होने नहीं देते, जागरूक होकर स्वतंत्र निर्णय लेकर कोई काम करने नहीं देते उसके बाद भी ये दोनों लड़के गाँव से बाहर निकलके समाज के हित में स्वतंत्र रूप से कुछ काम कर रहे हैं तो इनके उपर निश्चित रूप से ख़तरा है और यह ख़तरा ना केवल माओवादियों की तरफ से है बल्कि पुलिस की तरफ से भी है. अगर पुलिस को पता है और पुलिस ने इत्तिला किया है कि तुम सावधान रहना तो इतना बोलने से नहीं होता है. यह पुलिस की जवाबदारी बनती है कि उनको सुरक्षित करो. रमेश ने भी साल भर पहले बताया था कि उसके उपर ख़तरा है तो रमेश को मैंने अपने पास रायपुर बुला लिया था लॉकडाउन के पहले रमेश घर गया और वह वापस नहीं आ पाया. रमेश और मंगल दोनों के जान की हमें चिंता है अगर पुलिस या तो ऐसे दुष्प्रचार कर रही है या फिर ओ कोई फायदा उठाना चाहती है या किसी जननेता को मंगल कुंजाम की हत्या में फंसाना चाहती है.”

आदिवासियों के आंदोलन में पुलिस से अपने अंदाज में बात करते पत्रकार मंगल कुंजाम

इस मामले को लेकर दंतेवाड़ा एसपी डा. अभिषेक पल्लव ने कहा है कि “मंगल के जीजा मिट्ठू मरकाम की हत्या हुई थी. उस समय नक्सलियों ने पर्चा जारी किया था. उसमें यह बात लिखी थी कि 20 हजार करोड़ का स्पंज आयरन प्लांट को मंगल कुंजाम बेच रहा है. नंदा नाम का नक्सली पकड़ा गया था, उससे पूछताछ में बात आई थी. रेडियो इंटरसेप्शन में यह बात सामने आई थी. इनका और राजू भास्कर (जनपद सदस्य हिरोली गुमियापाल क्षेत्र) दोनों को ख़तरा है. यह हमारा खतरे का आकलन है. जब भी किसी को थ्रेट आता है तो उनको सूचित किया जाता हैं. अभी इस लेबल का थ्रेट नहीं आया है इसलिए अभी सुरक्षा की जरूतर नहीं है जब थ्रेट आएगा तब हम मुख्यालय को इसकी सुचना देंगे”

मंगल कुंजाम ने व्हाट्सएप ग्रुप के अपने एक पोस्ट में बताया है कि ‘‘किरंदुल टीआई ने फोन पर कहा है कि मंगल कहीं इधर उधर जाना नहीं, दरभा डिवीजन सचिव ने आपको जान से मारने के लिए आदेश दिया है, इस बावत टीआई के पास एसपी साहब का फोन आया था, तब मंगल कुंजाम के साथ स्थानीय पत्रकार अब्दुल हमीद सिद्दीकी भी थे. अब्दुल हमीद सिद्दीकी ने पत्रकार बप्पी राय को इस मामले में सुचना दी है.’’

किरन्दुल के स्थानीय पत्रकार अब्दुल हमीद सिद्दीकी ने बताया कि “यह आज का नहीं है पुलिस तो अब खुलासा की है, नक्सली कुछ ना कुछ बदले की भावना रख रहे हैं, रमेश कुंजाम और मंगल कुंजाम के उपर जान का खतरा था इसलिए मंगल के भाई को भी गाँव से हटाया गया. आंचलिक स्तर के पत्रकार बस्तर में बहुत कम हैं. मंगल ने अपनी गतिविधियों से काफी नाम कमाया है.”

मंगल कुंजाम का कहना है कि इस खबर के सामने आने से अब वे काफी परेशान हैं, क्योंकि बहुत दिनों से गाँव के साथियों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिल रही थी कि उनके बारे में लगातार पता लगाया जा रहा है कि मंगल कुंजाम का काम कैसा है और भरोसे के लायक हैं या नहीं !

पत्रकार साई रेड्डी की हत्या के विरोध में नक्सलियों के खिलाफ अबूझमाड़ में 05 दिनों की पैदल यात्रा करने वाले चुनिन्दा पत्रकारों में शामिल मंगल कुंजाम

मंगल कुंजाम ने आगे बताया है कि इस प्रकार की सामान्य पूछताछ को उन्होंने पहले कभी गंभीरता से नहीं लिया. मंगल कुंजाम को लगता है कि उन्हें और उनके भाई रमेश कुंजाम के खिलाफ जो माहौल बनाया गया है वह एक बड़ी साजिश है.

मंगल कुंजाम निडर पत्रकारिता की मिशाल रहे हैं अपने निष्पक्ष पत्रकारिता के दम पर उन्होंने नक्सली और पुलिसिया मामले की बहुत बखियां उधेड़ कर रखा हुआ है.

मंगल कहते हैं कि “पुलिस कभी अंदर कर देने की बात करती रही है, कभी माओवादी हत्या कर देंगे ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं, मुझे फिर भी निष्पक्ष रहकर जनता के लिए पत्रकारिता करते रहना है. मंगल कुंजाम ने दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ से मामले में दखल देने की अपील की है.”

पत्रकार बप्पी राय कहते हैं कि “मंगल कुंजाम की सुरक्षा हम लोग देख रहे हैं. हम आने वाले दिनों में अंदरूनी इलाकों में पत्रकार साथियों के साथ जाकर माओवादी नेताओं से इस मसले पर बात करेंगे.”

इस मसले पर हमारे सम्पादक प्रभात सिंह का कहना है कि “जिस प्रकार जनप्रतिनिधियों को बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विशेष सुरक्षा प्रदान की गई हैं, राजू भास्कर को भी मिले, मंगल कुंजाम के परिवार की लगातार होती हत्याओं के बाद सरकार की ओर से उनके परिवार के सुरक्षा की समीक्षा करते हुए तत्काल जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए.”

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