बस्तर

गुमियापाल के ग्रामीणों का साथ देते भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं

प्रभात सिंह @ दंतेवाड़ा गुमियापाल में शराब पी रहे 05 में से 02 आदिवासियों की हत्या के मामले में एसपी दंतेवाड़ा डॉक्टर अभिषेक पल्लव के आत्मसमर्पित नक्सली पोदिया और उनके डीआरजी में शामिल हत्यारे नक्सलियों और पुलिस की टोली पूरी तरह से घिर गई है। पहली बार देखा गया है कि एसपी डॉक्टर अभिषेक पल्लव ने अपने प्रेस नोट में इन दोनों हत्याओं का क्रेडिट भी अपने वरीय पुलिस अफसरों को नहीं दिया है।

वहीं दंतेवाड़ा पुलिस के आत्मसमर्पित नक्सलियों और पुलिस की टोली डीआरजी के जवानों पर गुमियापाल के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि डीआरजी ने साजिश रचकर ग्रामीण पोदिया की हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड को अंजाम देने वह नक्सली पोदिया भी आत्मसमर्पण के बाद अपने साथी डीआरजी के जवानों के साथ गाँव आ धमका था। जिसके खिलाफ कई सारे मामले पुलिस ने दर्ज कर रखे थे।

इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में ग्रामीणों ने किरंदुल थाने के द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। जिसमें सोनी सोरी और बेला भाटिया ग्रामीणों के बुलावे पर उनके साथ शामिल हुई थी। इनके साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक, दंतेवाड़ा के पूर्व कलेक्टर और विवादास्पद भाजपा नेता ओमप्रकाश चौधरी, भाटापारा विधायक शिवरतन शर्मा, किरंदुल के स्थानीय नेता आर.सी.नाहक और जनता से धोखाधड़ी कर जिला पंचायत उपाध्यक्ष बने गीदम के भाजपा नेता मनीष सुराना के साथ दर्जन भर से अधिक भाजपाई भी 15 सालों में पहली बार आदिवासियों के समर्थन में पहुँचे थे।

दंतेवाड़ा पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक पल्लव ने बड़ी ही चालाकी से भाजपा के इन नेताओं को इस एफआईआर से अलग रखकर ग्रामीणों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ अपने किरंदुल निरीक्षक से एफआईआर दर्ज करवाया है।

किरंदुल पुलिस के निरीक्षक डी. के.बरवा ने 154 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत मामला दर्ज किया है। जिसमें उनके द्वारा आदर्श आचार संहिता का उल्लधंन करने संबंधी आरोप लगाया गया है। जबकि उनके थाना क्षेत्र में आदिवासियों की निर्मम हत्या पर डीआरजी के आत्मसमर्पित नक्सलियों और पुलिस की टोली के खिलाफ एफआईआर करने से वे अब तक बच रहे हैं। निरीक्षक बरवा ने आपनेत्री सोनी सोरी सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया, हिरोली के सरपंचपति भीमा, मड़कामीरास के सरपंच नंदा मडकाम के साथ 150-200 ग्रामीणों द्वारा थाने का घेराव करने थाना किरन्दुल के मेन गेट में आकर पुलिस एवं प्रशासन के विरूद्ध अवैध रूप से नारे बाजी करने का आरोप लगाते हुए आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस एफआईआर से भाजपा नेताओं को मुक्त रखने पर खुद ही आरोपों में घिर चुके हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दंतेवाड़ा पुलिस अब भी भाजपा सरकार के प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाई है।

भाजपा नेता यहाँ करीब एक घंटे थे। जहाँ धरमलाल कौशिक ने इस प्रदर्शन पर आदिवासियों को भरोसा दिलाते हुए कहा था कि फर्जी मुठभेड़ की आवाज वे विधानसभा में उठाएंगे और सरकार से पूछेंगे कि कैसे निर्दोषों को मारा जा रहा है। प्रदर्शन में आदिवासी गुमियापाल के ग्रामीण अजय को सामने लाने की मांग कर रहे थे। लेकिन अफसरों ने उनकी बात नहीं मानी और एसपी दंतेवाड़ा ने बयान जारी कर बताया कि अजय ने न्यायालय में 164 की गवाही दी है जबकि अन्य चश्मदीद भी 164 की गवाही देने दंतेवाड़ा पुलिस से गुहार लगा रहे थे। लेकिन उनको दंतेवाड़ा पुलिस ने अब तक गवाही योग्य समझा ही नहीं है।

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