बस्तर

माओवादियों से लड़ने पहली बार उतारी गई महिला कमांडो

  • पहली बार के मुठभेड़ में ही एक महिला नक्सली को मार डाला
  • महिला कमांडो दस्ते का दंतेश्वरी लड़ाके रखा गया है नाम
  • माओवादी इलाके में 20 महिलाओं की टीम के 12 महिलाएं गई थी

खबरी चिड़िया @ दंतेवाडा बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलवाद से निपटने अनेकानेक प्रकार के प्रयोग होते रहते हैं। अब ऐसा ही एक नया प्रयोग महिला कमांडो के रूप में दिखाई दे रही है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को पहली बार आपरेशन में निकली महिला कमांडो का गोंडेरास के जंगल में सुबह आठ बजे माओवादियों से मुठभेड़ हो गया। महिला कमांडो ने तुरंत मोर्चा संभाला और अपने करियर की पहली मुठभेड़ में ही एक महिला माओवादी को मार डाला। मुठभेड़ खत्म होने के बाद जब घटना स्थल को खंगाला गया तो वहाँ से एक इंसास, एक भरमार समेत काफी सख्या में कारतूस, देशी ग्रेंनेड एवं दवाइयाँ बरामद हुई। 

पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया की मुखबिर से लगातार सूचना मिल रही थी कि गोंडेरास के जंगल में माओवादियों का जमावड़ा हैं। इसमे श्याम दादा, विनोद एवं देवा और सुकमा से आई एक प्लाटून भी मौजूद है। मुठभेड़ के बाद मौके पर दंतेवाडा पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अभिषेक पल्लव ने मोटरसाइकिल से पहुंचकर जवानो को हौसला अफजाई भी की।

आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया की सुकमा एवं दंतेवाड़ा जिले ने यह ऑपरेशन मिलकर चलाया था। एक तरफ सुकमा के अरनपुर इलाके से तो दूसरी तरफ से दंतेवाडा जिले की तरफ से जवानों का दल रवाना हुआ था। लेकिन दंतेवाड़ा की ओर से गई टीम से माओवादियों का सामना हुआ और महिला कमांडोज ने एक महिला माओवादी को मार डाला।

पुलिस के आने की सुचना आगे नक्सलियों तक कोई न पहुँचा सके इसलिए मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया गया था। पुलिस सूत्रों की माने तो इस बार पुलिस ने माओवादियों को निशान बनाने के लिए नया तरीका अपनाया था। पुलिस ने रात में गोंडेरास को घेर लिया था। वही रास्ते में पड़ने वाले जवानों की जानकारी माओवादियों तक न पहुँचे। इसे देखते हुए इलाके का नेटवर्क बंद कर दिया गया था। इसके बाद ही यह आपरेशन चलाया गया था।

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